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Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 9

191 Sukta
21 Mantra
1/22/9
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॒ पत्नी॑रि॒हाव॑ह दे॒वाना॑मुश॒तीरुप॑। त्वष्टा॑रं॒ सोम॑पीतये॥

अग्ने॑ । पत्नीः॑ । इ॒ह । आ । व॒ह॒ । दे॒वाना॑म् । उ॒श॒तीः । उप॑ । त्वष्टा॑रम् । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
अग्ने पत्नीरिहावह देवानामुशतीरुप। त्वष्टारं सोमपीतये॥

अग्ने। पत्नीः। इह। आ। वह। देवानाम्। उशतीः। उप। त्वष्टारम्। सोमऽपीतये॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 5 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अग्ने) जो यह भौतिक अग्नि (सोमपीतये) जिस व्यवहार में सोम आदि पदार्थों का ग्रहण होता है, उसके लिये (देवानाम्) इकत्तीस जो कि पृथिवी आदि लोक हैं, उनकी (उशतीः) अपने-अपने आधार के गुणों का प्रकाश करनेवाला (पत्नीः) स्त्रीवत् वर्त्तमान अदिति आदि पत्नी और (त्वष्टारम्) छेदन करनेवाले सूर्य्य वा कारीगर को (उपावह) अपने सामने प्राप्त करता है, उसका प्रयोग ठीक-ठीक करें॥९॥
Essence
विद्वानों को उचित है कि जो बिजुली प्रसिद्ध और सूर्य्यरूप से तीन प्रकार का भौतिक अग्नि शिल्पविद्या की सिद्धि के लिये पृथिवी आदि पदार्थों के सामर्थ्य प्रकाश करने में मुख्य हेतु है, उसी का स्वीकार करें और यह इस शिल्पविद्यारूपी यज्ञ में पृथिवी आदि पदार्थों के सामर्थ्य का पत्नी नाम विधान किया है, उसको जानें॥९॥
Subject
फिर अगले मन्त्र में अग्नि के गुणों का उपदेश किया है-