Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 6

191 Sukta
21 Mantra
1/22/6
Devata- सविता Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒पां नपा॑त॒मव॑से सवि॒तार॒मुप॑ स्तुहि। तस्य॑ व्र॒तान्यु॑श्मसि॥

अ॒पाम् । नपा॑तम् । अव॑से । स॒वि॒तार॑म् । उप॑ । स्तु॒हि॒ । तस्य॑ । व्र॒तानि॑ । उ॒श्म॒सि॒ ॥

Mantra without Swara
अपां नपातमवसे सवितारमुप स्तुहि। तस्य व्रतान्युश्मसि॥

अपाम्। नपातम्। अवसे। सवितारम्। उप। स्तुहि। तस्य। व्रतानि। उश्मसि॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 5 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे धार्मिक विद्वान् मनुष्य ! जैसे मैं (अवसे) रक्षा आदि के लिये (अपाम्) जो सब पदार्थों को व्याप्त होने अन्त आदि पदार्थों के वर्त्ताने तथा (नपातम्) अविनाशी और (सवितारम्) सकल ऐश्वर्य्य के देनेवाले परमेश्वर की स्तुति करता हूँ, वैसे तू भी उसकी (उपस्तुहि) निरन्तर प्रशंसा कर। हे मनुष्यो ! जैसे हम लोग जिसके (व्रतानि) निरन्तर धर्मयुक्त कर्मों को (उश्मसि) प्राप्त होने की कामना करते हैं, वैसे (तस्य) उसके गुण कर्म्म और स्वभाव को प्राप्त होने की कामना तुम भी करो॥६॥
Essence
जैसे विद्वान् मनुष्य परमेश्वर की स्तुति करके उसकी आज्ञा का आचरण करता है, वैसे तुम लोगों को भी उचित है कि उस परमेश्वर के रचे हुए संसार में अनेक प्रकार के उपकार ग्रहण करो॥६॥
Subject
फिर उस परमेश्वर की स्तुति करनी चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-