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Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 5

191 Sukta
21 Mantra
1/22/5
Devata- सविता Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
हिर॑ण्यपाणिमू॒तये॑ सवि॒तार॒मुप॑ ह्वये। स चेत्ता॑ दे॒वता॑ प॒दम्॥

हिर॑ण्यऽपाणिम् । ऊ॒तये॑ । स॒वि॒तार॑म् । उप॑ । ह्व॒ये॒ । सः । चेत्ता॑ । दे॒वता॑ । प॒दम् ॥

Mantra without Swara
हिरण्यपाणिमूतये सवितारमुप ह्वये। स चेत्ता देवता पदम्॥

हिरण्यऽपाणिम्। ऊतये। सवितारम्। उप। ह्वये। सः। चेत्ता। देवता। पदम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 4 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
मैं (ऊतये) प्रीति के लिये जो (पदम्) सब चराचर जगत् को प्राप्त और (हिरण्यपाणिम्) जिससे व्यवहार में सुवर्ण आदि रत्न मिलते हैं, उस (सवितारम्) सब जगत् के अन्तर्यामी ईश्वर को (उपह्वये) अच्छी प्रकार स्वीकार करता हूँ (सः) वह परमेश्वर (चेत्ता) ज्ञानस्वरूप और (देवता) पूज्यतम देव है॥५॥
Essence
मनुष्यों को जो चेतनमय सब जगह प्राप्त होने और निरन्तर पूजन करने योग्य प्रीति का एक पुञ्ज और ऐश्वर्य्यों का देनेवाला परमेश्वर है, वही निरन्तर उपासना के योग्य है। इस विषय में इसके विना कोई दूसरा पदार्थ उपासना के योग्य नहीं है॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में परम ऐश्वर्य्य करानेवाले परमेश्वर का प्रकाश किया है-