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Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 3

191 Sukta
21 Mantra
1/22/3
Devata- अश्विनौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या वां॒ कशा॒ मधु॑म॒त्यश्वि॑ना सू॒नृता॑वती। तया॑ य॒ज्ञं मि॑मिक्षतम्॥

या । वा॒म् । कशा॑ । मधु॑ऽमती । अश्वि॑ना । सू॒नृता॑ऽवती । तया॑ । य॒ज्ञम् । मि॒मि॒क्ष॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती। तया यज्ञं मिमिक्षतम्॥

या। वाम्। कशा। मधुऽमती। अश्विना। सूनृताऽवती। तया। यज्ञम्। मिमिक्षतम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 4 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे उपदेश करने वा सुनने तथा पढ़ने-पढ़ानेवाले मनुष्यो ! (वाम्) तुम्हारे (अश्विना) गुणप्रकाश करनेवालों की (या) जो (सूनृतावती) प्रशंसनीय बुद्धि से सहित (मधुमती) मधुरगुणयुक्त (कशा) वाणी है, (तया) उससे तुम (यज्ञम्) श्रेष्ठ शिक्षारूप यज्ञ को (मिमिक्षतम्) प्रकाश करने की इच्छा नित्य किया करो॥३॥
Essence
उपदेश के विना किसी मनुष्य को ज्ञान की वृद्धि कुछ भी नहीं हो सकती, इससे सब मनुष्यों को उत्तम विद्या का उपदेश तथा श्रवण निरन्तर करना चाहिये॥३॥
Subject
वे क्रिया में किनसे संयुक्त हो सकते हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-