Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 11

191 Sukta
21 Mantra
1/22/11
Devata- देव्यः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒भि नो॑ दे॒वीरव॑सा म॒हः शर्म॑णा नृ॒पत्नीः॑। अच्छि॑न्नपत्राः सचन्ताम्॥

अ॒भि । नः॒ । दे॒वीः । अव॑सा । म॒हः । शर्म॑णा । नृ॒ऽपत्नीः॑ । अच्छि॑न्नऽपत्राः । स॒च॒न्ता॒म् ॥

Mantra without Swara
अभि नो देवीरवसा महः शर्मणा नृपत्नीः। अच्छिन्नपत्राः सचन्ताम्॥

अभि। नः। देवीः। अवसा। महः। शर्मणा। नृऽपत्नीः। अच्छिन्नऽपत्राः। सचन्ताम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 6 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(अच्छिन्नपत्राः) जिन के अविनष्ट कर्मसाधन और (देवीः) (नृपत्नीः) जो क्रियाकुशलता में चतुर विद्वान् पुरुषों की स्त्रियाँ हैं, वे (महः) बड़े (शर्मणा) सुखसम्बन्धी घर (अवसा) रक्षा विद्या में प्रवेश आदि कर्मों के साथ (नः) हम लोगों को (अभिसचन्ताम्) अच्छी प्रकार मिलें॥११॥
Essence
जैसी विद्या, गुण, कर्म और स्वभाववाले पुरुष हों, उनकी स्त्री भी वैसे ही होनी ठीक हैं, क्योंकि जैसा तुल्य रूप विद्या गुण कर्म स्वभाववालों को सुख का सम्भव होता है, वैसा अन्य को कभी नहीं हो सकता। इससे स्त्री अपने समान पुरुष वा पुरुष अपने समान स्त्रियों के साथ आपस में प्रसन्न होकर स्वयंवर विधान से विवाह करके सब कर्मों को सिद्ध करें॥११॥
Subject
अब विद्वानों की स्त्रियाँ भी उक्त कार्य्यों को करें, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में कहा है-

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.