Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 22 / Mantra 10

191 Sukta
21 Mantra
1/22/10
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ ग्ना अ॑ग्न इ॒हाव॑से॒ होत्रां॑ यविष्ठ॒ भार॑तीम्। वरू॑त्रीं धि॒षणां॑ वह॥

आ । ग्नाः । अ॒ग्ने॒ । इ॒ह । अव॑से । होत्रा॑म् । य॒वि॒ष्ठ॒ । भार॑तीम् । वरू॑त्रीम् । धि॒षणा॑म् । व॒ह॒ ॥

Mantra without Swara
आ ग्ना अग्न इहावसे होत्रां यविष्ठ भारतीम्। वरूत्रीं धिषणां वह॥

आ। ग्नाः। अग्ने। इह। अवसे। होत्राम्। यविष्ठ। भारतीम्। वरूत्रीम्। धिषणाम्। वह॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 5 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (यविष्ठ) पदार्थों को मिलाने वा उनमें मिलनेवाले (अग्ने) क्रियाकुशल विद्वान् ! तू (इह) शिल्पकार्य्यों में (अवसे) प्रवेश करने के लिये (ग्नाः) पृथिवी आदि पदार्थ (होत्राम्) होम किये हुए पदार्थों को बहाने (भारतीम्) सूर्य्य की प्रभा (वरूत्रीम्) स्वीकार करने योग्य दिन रात्रि और (धिषणाम्) जिससे पदार्थों को ग्रहण करते हैं, उस वाणी को (आवह) प्राप्त हो॥१०॥
Essence
विद्वानों को इस संसार में मनुष्य जन्म पाकर वेद द्वारा सब विद्या प्रत्यक्ष करनी चाहिये, क्योंकि कोई भी विद्या पदार्थों के गुण और स्वभाव को प्रत्यक्ष किये विना सफल नहीं हो सकती॥१०॥
Subject
वे कौन-कौन देवपत्नी हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.