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Rigveda Mandal 1 / Sukta 21 / Mantra 4

191 Sukta
6 Mantra
1/21/4
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒ग्रा सन्ता॑ हवामह॒ उपे॒दं सव॑नं सु॒तम्। इ॒न्द्रा॒ग्नी एह ग॑च्छताम्॥

उ॒ग्रा । सन्ता॑ । ह॒वा॒म॒हे॒ । उप॑ । इ॒दम् । सव॑नम् । सु॒तम् । इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑ । आ । इ॒ह । ग॒च्छ॒ता॒म् ॥

Mantra without Swara
उग्रा सन्ता हवामह उपेदं सवनं सुतम्। इन्द्राग्नी एह गच्छताम्॥

उग्रा। सन्ता। हवामहे। उप। इदम्। सवनम्। सुतम्। इन्द्राग्नी इति। आ। इह। गच्छताम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 3 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हम लोग विद्या की सिद्धि के लिये जिन (उग्रा) तीव्र (सन्ता) वर्त्तमान (इन्द्राग्नी) वायु और अग्नि का (हवामहे) उपदेश वा श्रवण करते हैं, वे (इदम्) इस प्रत्यक्ष (सवनम्) अर्थात् जिससे पदार्थों को उत्पन्न और (सुतम्) उत्तम शिल्पक्रिया से सिद्ध किये हुए व्यवहार को (उपागच्छताम्) हमारे निकटवर्ती करते हैं॥४॥
Essence
मनुष्यों को जिस कारण ये दृष्टिगोचर हुए तीव्र वेग आदि गुणवाले वायु और अग्नि शिल्पक्रियायुक्त व्यवहार में सम्पूर्ण कार्य्यों के उपयोगी होते हैं, इससे इनको विद्या की सिद्धि के लिये कार्यों में सदा संयुक्त करना चाहिये॥४॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-