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Rigveda Mandal 1 / Sukta 20 / Mantra 5

191 Sukta
8 Mantra
1/20/5
Devata- ऋभवः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सं वो॒ मदा॑सो अग्म॒तेन्द्रे॑ण च म॒रुत्व॑ता। आ॒दि॒त्येभि॑श्च॒ राज॑भिः॥

सम् । वः॒ । मदा॑सः । अ॒ग्म॒त॒ । इन्द्रे॑ण । च॒ । म॒रुत्व॑ता । आ॒दि॒त्येभिः॑ । च॒ । राज॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
सं वो मदासो अग्मतेन्द्रेण च मरुत्वता। आदित्येभिश्च राजभिः॥

सम्। वः। मदासः। अग्मत। इन्द्रेण। च। मरुत्वता। आदित्येभिः। च। राजऽभिः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 1 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे मेधावि विद्वानो ! तुम लोग जिन (मरुत्वता) जिसके सम्बन्धी पवन हैं, उस (इन्द्रेण) बिजुली वा (राजभिः) प्रकाशमान (आदित्येभिः) सूर्य्य की किरणों के साथ युक्त करते हो, इससे (मदासः) विद्या के आनन्द (वः) तुम लोगों को (अग्मत) प्राप्त होते हैं, इससे तुम लोग उनसे ऐश्वर्य्यवाले हूजिये॥५॥
Essence
जो विद्वान् लोग जब वायु और विद्युत् का आलम्ब लेकर सूर्य्य की किरणों के समान आग्नेयादि अस्त्र, असि आदि शस्त्र और विमान आदि यानों को सिद्ध करते हैं, तब वे शत्रुओं को जीत राजा होकर सुखी होते हैं॥५॥
Subject
फिर ये किससे क्या करें, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-