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Rigveda Mandal 1 / Sukta 20 / Mantra 4

191 Sukta
8 Mantra
1/20/4
Devata- ऋभवः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
युवा॑ना पि॒तरा॒ पुनः॑ स॒त्यम॑न्त्रा ऋजू॒यवः॑। ऋ॒भवो॑ वि॒ष्ट्य॑क्रत॥

युवा॑ना । पि॒तरा॑ । पुन॒रिति॑ । स॒त्यऽम॑न्त्राः । ऋ॒जू॒ऽयवः॑ । ऋ॒भवः॑ । वि॒ष्टी । अ॒क्र॒त॒ ॥

Mantra without Swara
युवाना पितरा पुनः सत्यमन्त्रा ऋजूयवः। ऋभवो विष्ट्यक्रत॥

युवाना। पितरा। पुनरिति। सत्यऽमन्त्राः। ऋजूऽयवः। ऋभवः। विष्टी। अक्रत॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 1 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
जो (ऋजूयवः) कर्मों से अपनी सरलता को चाहने और (सत्यमन्त्राः) सत्य अर्थात् यथार्थ विचार के करनेवाले (ऋभवः) बुद्धिमान् सज्जन पुरुष हैं, वे (विष्टी) व्याप्त होने (युवाना) मेल अमेल स्वभाववाले तथा (पितरा) पालनहेतु पूर्वोक्त अग्नि और जल को क्रिया की सिद्धि के लिये वारम्वार (अक्रत) अच्छी प्रकार प्रयुक्त करते हैं॥४॥
Essence
जो आलस्य को छोड़े हुए सत्य में प्रीति रखने और सरल बुद्धिवाले मनुष्य हैं, वे ही अग्नि और जल आदि पदार्थों से उपकार लेने को समर्थ हो सकते हैं॥४॥
Subject
फिर वे विद्वान् कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-

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