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Rigveda Mandal 1 / Sukta 20 / Mantra 2

191 Sukta
8 Mantra
1/20/2
Devata- ऋभवः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य इन्द्रा॑य वचो॒युजा॑ तत॒क्षुर्मन॑सा॒ हरी॑। शमी॑भिर्य॒ज्ञमा॑शत॥

ये । इन्द्रा॑य । व॒चः॒ऽयुजा॑ । त॒त॒क्षुः । मन॑सा । हरी॒ इति॑ । शमा॑ईभिः । य॒ज्ञम् । आ॒श॒त॒ ॥

Mantra without Swara
य इन्द्राय वचोयुजा ततक्षुर्मनसा हरी। शमीभिर्यज्ञमाशत॥

ये। इन्द्राय। वचःऽयुजा। ततक्षुः। मनसा। हरी इति। शमाईभिः। यज्ञम्। आशत॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 1 Mantra » 2

Bhashya

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Meaning
(ये) जो ऋभु अर्थात् उत्तम बुद्धिवाले विद्वान् लोग (मनसा) अपने विज्ञान से (वचोयुजा) वाणियों से सिद्ध किये हुए (हरी) गमन और धारण गुणों को (ततक्षुः) अतिसूक्ष्म करते और उनको (शमीभिः) दण्डों से कलायन्त्रों को घुमाके (इन्द्राय) ऐश्वर्य्यप्राप्ति के लिये (यज्ञम्) पुरुषार्थ से सिद्ध करनेयोग्य यज्ञ को (आशत) परिपूर्ण करते हैं, वे सुखों को बढ़ा सकते हैं॥२॥
Essence
जो विद्वान् पदार्थों के संयोग वा वियोग से धारण आकर्षण वा वेगादि गुणों को जानकर क्रियाओं से शिल्पव्यवहार आदि यज्ञ को सिद्ध करते हैं, वे ही उत्तम-उत्तम ऐश्वर्य्य को प्राप्त होते हैं॥२॥
Subject
फिर वे विद्वान् कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-

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