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Rigveda Mandal 1 / Sukta 191 / Mantra 5

191 Sukta
16 Mantra
1/191/5
Devata- अबोषधिसूर्याः Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ए॒त उ॒ त्ये प्रत्य॑दृश्रन्प्रदो॒षं तस्क॑रा इव। अदृ॑ष्टा॒ विश्व॑दृष्टा॒: प्रति॑बुद्धा अभूतन ॥

ए॒ते । ऊँ॒ इति॑ । त्ये । प्रति॑ । अ॒दृ॒श्र॒न् । प्र॒ऽदो॒षम् । तस्क॑राःऽइव । अदृ॑ष्टाः । विश्व॑ऽदृश्टाः । प्रति॑ऽबुद्धाः । अ॒भू॒त॒न॒ ॥

Mantra without Swara
एत उ त्ये प्रत्यदृश्रन्प्रदोषं तस्करा इव। अदृष्टा विश्वदृष्टा: प्रतिबुद्धा अभूतन ॥

एते। ऊँ इति। त्ये। प्रति। अदृश्रन्। प्रऽदोषम्। तस्कराःऽइव। अदृष्टाः। विश्वऽदृष्टाः। प्रतिऽबुद्धाः। अभूतन ॥ १.१९१.५

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 14 Mantra » 5

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Meaning
(त्ये) वे (एते) (उ) ही पूर्वोक्त विषधर वा विष (प्रदोषम्) रात्रि के आरम्भ में (तस्कराइव) जैसे चोर वैसे (प्रत्यदृश्रन्) प्रतीति से दिखाई देते हैं। हे (अदृष्टाः) दृष्टिपथ न आनेवालो वा (विश्वदृष्टाः) सबके देखे हुए विषधारियो ! तुम (प्रतिबुद्धाः) प्रतीत ज्ञान से अर्थात् ठीक समय से युक्त (अभूतन) होओ ॥ ५ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे चोरों में डाँकू देखे और न देखे होते हैं, वैसे मनुष्य नाना प्रकार के प्रसिद्ध-अप्रसिद्ध विषधारियों वा विषों को जानें ॥ ५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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