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Rigveda Mandal 1 / Sukta 188 / Mantra 8

191 Sukta
11 Mantra
1/188/8
Devata- आप्रियः Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
भार॒तीळे॒ सर॑स्वति॒ या व॒: सर्वा॑ उपब्रु॒वे। ता न॑श्चोदयत श्रि॒ये ॥

भार॑ति । इळे॑ । सर॑स्वति । याः । वः॒ । सर्वाः॑ । उ॒प॒ऽब्रु॒वे । ताः । नः॒ । चो॒द॒य॒त॒ । श्रि॒ये ॥

Mantra without Swara
भारतीळे सरस्वति या व: सर्वा उपब्रुवे। ता नश्चोदयत श्रिये ॥

भारति। इळे। सरस्वति। याः। वः। सर्वाः। उपऽब्रुवे। ताः। नः। चोदयत। श्रिये ॥ १.१८८.८

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (भारति) समस्त विद्या के धारण करनेवाली वा (इळे) हे प्रशंसावती वा (सरस्वति) हे विज्ञान और उत्तम गतिवाली ! (याः) जो (वः) तुम (सर्वाः) सभों को समीप में (उपब्रुवे) उपयोग करनेवाले वचन का उपदेश करूँ (ताः) वे तुम (नः) हम लोगों का (श्रिये) लक्ष्मी प्राप्त होने के लिये (चोदयत) प्रेरणा देओ ॥ ८ ॥
Essence
जो प्रशंसित सौन्दर्य उत्तम लक्षणों से युक्त देखी गई, श्रेष्ठतर शास्त्रविज्ञान में रमनेवाली कन्या हों, वे अपने पाणिग्रहण करनेवाले पतियों को पाकर धर्म से धनादि पदार्थों की उन्नति करें ॥ ८ ॥
Subject
अब स्त्रीपुरुष के विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।