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Rigveda Mandal 1 / Sukta 188 / Mantra 6

191 Sukta
11 Mantra
1/188/6
Devata- आप्रियः Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सु॒रु॒क्मे हि सु॒पेश॒साधि॑ श्रि॒या वि॒राज॑तः। उ॒षासा॒वेह सी॑दताम् ॥

सु॒रु॒क्मे॒ इति॑ सु॒ऽरु॒क्मे । हि । सु॒ऽपेश॑सा । अधि॑ । श्रि॒या । वि॒ऽराज॑तः । उ॒षसौ॑ । आ । इ॒ह । सी॒द॒ता॒म् ॥

Mantra without Swara
सुरुक्मे हि सुपेशसाधि श्रिया विराजतः। उषासावेह सीदताम् ॥

सुरुक्मे इति सुऽरुक्मे। हि। सुऽपेशसा। अधि। श्रिया। विऽराजतः। उषसौ। आ। इह। सीदताम् ॥ १.१८८.६

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे अध्यापक और उपदेशक लोगो ! जैसे (इह) इस कार्यकारण विद्या में (सुरुक्मे) सुन्दर रमणीय (सुपेशसा) प्रशंसित स्वरूप कार्य्यकारण (श्रिया) शोभा से (अधि, विराजतः) देदीप्यमान होते हैं (हि) उन्हीं को जानकर (उषासौ) रात्रि, दिन के समान आप लोग परोपकार में (आ, सीदताम्) अच्छे प्रकार स्थिर होओ ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो इस सृष्टि के विद्या और अच्छी शिक्षा को पाकर कार्य्यज्ञानपूर्वक कारणज्ञान को प्राप्त होते हैं, वे सूर्य-चन्द्रमा के समान परोपकार में रमते हैं ॥ ६ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।