Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 185 / Mantra 9

191 Sukta
11 Mantra
1/185/9
Devata- द्यावापृथिव्यौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उ॒भा शंसा॒ नर्या॒ माम॑विष्टामु॒भे मामू॒ती अव॑सा सचेताम्। भूरि॑ चिद॒र्यः सु॒दास्त॑राये॒षा मद॑न्त इषयेम देवाः ॥

उ॒भा । शंसा॑ । नर्या॑ । माम् । अ॒वि॒ष्टा॒म् । उ॒भे इति॑ । माम् । ऊ॒ती इति॑ । अव॑सा । स॒चे॒ता॒म् । भूरि॑ । चि॒त् । अ॒र्यः । सु॒दाःऽत॑राय । इ॒षा । मद॑न्तः । इ॒ष॒ये॒म॒ । दे॒वाः॒ ॥

Mantra without Swara
उभा शंसा नर्या मामविष्टामुभे मामूती अवसा सचेताम्। भूरि चिदर्यः सुदास्तरायेषा मदन्त इषयेम देवाः ॥

उभा। शंसा। नर्या। माम्। अविष्टाम्। उभे इति। माम्। ऊती इति। अवसा। सचेताम्। भूरि। चित्। अर्यः। सुदाःऽतराय। इषा। मदन्तः। इषयेम। देवाः ॥ १.१८५.९

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 3 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(उभा) दोनों (शंसा) प्रशंसा को प्राप्त (नर्य्या) मनुष्यों में उत्तम द्यावापृथिवी के समान माता-पिता (माम्) मेरी (अनिष्टाम्) रक्षा करें और (माम्) मुझे (उभे) दोनों (ऊती) रक्षाएँ (अवसा) औरों की रक्षा आदि के साथ (सचेताम्) प्राप्त होवें। हे (देवाः) विद्वानो ! (अर्यः) वणिया (सुदास्तराय) अतीव देनेवाले के लिये (भूरि, चित्) बहुत जैसे देवे वैसे (मदन्तः) सुखी होते हुए हम लोग (इषा) इच्छा से (इषयेम) प्राप्त होवें ॥ ९ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे सूर्य्य और चन्द्रमा सबका संयोग कर प्राणियों को सुखी करते हैं तथा जैसे धनाढ्य वैश्य बहुत अन्न आदि पदार्थ देकर भिखारियों को प्रसन्न करता है, वैसे विद्वान् जन सबके प्रसन्न करने में प्रवृत्त होवें ॥ ९ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.