Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 185 / Mantra 2

191 Sukta
11 Mantra
1/185/2
Devata- द्यावापृथिव्यौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
भूरिं॒ द्वे अच॑रन्ती॒ चर॑न्तं प॒द्वन्तं॒ गर्भ॑म॒पदी॑ दधाते। नित्यं॒ न सू॒नुं पि॒त्रोरु॒पस्थे॒ द्यावा॒ रक्ष॑तं पृथिवी नो॒ अभ्वा॑त् ॥

भूरि॑ । द्वे इति॑ । अच॑रन्ती॒ इति॑ । चर॑न्तम् । प॒त्ऽवन्तम् । गर्भ॑म् । अ॒पदी॒ इति॑ । द॒धा॒ते॒ इति॑ । नित्य॑म् । न । सू॒नुम् । पि॒त्रोः । उ॒पऽस्थे॑ । द्यावा॑ । रक्ष॑तम् । पृ॒थि॒वी॒ इति॑ । नः॒ । अभ्वा॑त् ॥

Mantra without Swara
भूरिं द्वे अचरन्ती चरन्तं पद्वन्तं गर्भमपदी दधाते। नित्यं न सूनुं पित्रोरुपस्थे द्यावा रक्षतं पृथिवी नो अभ्वात् ॥

भूरिम्। द्वे इति। अचरन्ती इति। चरन्तम्। पत्ऽवन्तम्। गर्भम्। अपदी इति। दधाते इति। नित्यम्। न। सूनुम्। पित्रोः। उपऽस्थे। द्यावा। रक्षतम्। पृथिवी इति। नः। अभ्वात् ॥ १.१८५.२

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 2 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (द्यावापृथिवी) द्यावापृथिवी के समान वर्त्तमान मातापितरो ! जैसे (अचरन्ती) इधर-उधर अपनी कक्षा को छोड़कर न जानेवाले (अपदी) पैरों से रहित (द्वे) दोनों द्यावापृथिवी (भूरिम्) बहुत (पद्वन्तम्) पगवाले (चरन्तम्) चलते हुए (गर्भम्) कार्य्यरूप जगत् को (पित्रोः) माता-पिता के (उपस्थे) गोद में नित्य (सूनुम्) पुत्र के (न) समान (दधाते) धारण करते हैं वैसे (अभ्वात्) मिथ्याचरण से उत्पन्न हुए दुःख से (नः) हम लोगों की (रक्षतम्) रक्षा करो ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे भूमि सूर्य दृढ़ होते हुए स्थावर, जङ्गम, चर, अचर, जगत् को बहुत प्रकार से पाल के बढ़ाते हैं, वैसे माता, पिता, अतिथि, आचार्य्य, सन्तान और शिष्यों की अच्छे प्रकार रक्षा कर विद्या और उत्तम शिक्षा से बढ़ावें ॥ २ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।