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Rigveda Mandal 1 / Sukta 184 / Mantra 4

191 Sukta
6 Mantra
1/184/4
Devata- अश्विनौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒स्मे सा वां॑ माध्वी रा॒तिर॑स्तु॒ स्तोमं॑ हिनोतं मा॒न्यस्य॑ का॒रोः। अनु॒ यद्वां॑ श्रव॒स्या॑ सुदानू सु॒वीर्या॑य चर्ष॒णयो॒ मद॑न्ति ॥

अ॒स्मे इति॑ । सा । वा॒म् । मा॒ध्वी॒ इति॑ । रा॒तिः । अ॒स्तु॒ । स्तोम॑म् । हि॒नो॒त॒म् । मा॒न्यस्य॑ । का॒रोः । अनु॑ । यत् । वा॒म् । श्र॒व॒स्या॑ । सु॒दा॒नू॒ इति॑ सुऽदानू । सु॒ऽवीर्या॑य । च॒र्ष॒णयः॑ । मद॑न्ति ॥

Mantra without Swara
अस्मे सा वां माध्वी रातिरस्तु स्तोमं हिनोतं मान्यस्य कारोः। अनु यद्वां श्रवस्या सुदानू सुवीर्याय चर्षणयो मदन्ति ॥

अस्मे इति। सा। वाम्। माध्वी इति। रातिः। अस्तु। स्तोमम्। हिनोतम्। मान्यस्य। कारोः। अनु। यत्। वाम्। श्रवस्या। सुदानू इति सुऽदानू। सुऽवीर्याय। चर्षणयः। मदन्ति ॥ १.१८४.४

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 1 Mantra » 4

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Meaning
हे (सूदानू) अच्छे देनेवाले ! जो (वाम्) तुम दोनों की (माध्वी) मधुरादि गुणयुक्त (रातिः) देनि वर्त्तमान है (सा) वह (अस्मे) हम लोगों के लिये (अस्तु) हो। और तुम (मान्यस्य) प्रशंसा के योग्य (कारोः) कार करनेवाले की (स्तोमम्) प्रशंसा को (हिनोतम्) प्राप्त होओ और (श्रवस्या) अपने को सुनने की इच्छा से (यत्) जिन (वाम्) तुमको (सुवीर्य्याय) उत्तम पराक्रम के लिये (चर्षणयः) साधारण मनुष्य (अनु, मदन्ति) अनुमोदन देते हैं तुम्हारी कामना करते हैं, उनको हम भी अनुमोदन देवें ॥ ४ ॥
Essence
जो आप्त श्रेष्ठ सद्धर्मी सज्जनों की नीति और विद्वानों की स्तुति मनोहर हो, वह उत्तम पराक्रम के लिये समर्थ होती है ॥ ४ ॥
Subject
अब सज्जनता का आश्रय लिये हुए अध्यापक और उपदेशक विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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