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Rigveda Mandal 1 / Sukta 183 / Mantra 5

191 Sukta
6 Mantra
1/183/5
Devata- अश्विनौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
यु॒वां गोत॑मः पुरुमी॒ळ्हो अत्रि॒र्दस्रा॒ हव॒तेऽव॑से ह॒विष्मा॑न्। दिशं॒ न दि॒ष्टामृ॑जू॒येव॒ यन्ता मे॒ हवं॑ नास॒त्योप॑ यातम् ॥

यु॒वम् । गोत॑मः । पु॒रु॒ऽमी॒ळ्हः । अत्रिः॑ । दस्रा॑ । हव॒ते । अव॑से । ह॒विष्मा॑न् । दिश॑म् । न । दि॒ष्टाम् । ऋ॒जु॒याऽइ॑व । यन्ता॑ । आ । मे॒ । हव॑म् । ना॒स॒त्या॒ । उप॑ । या॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
युवां गोतमः पुरुमीळ्हो अत्रिर्दस्रा हवतेऽवसे हविष्मान्। दिशं न दिष्टामृजूयेव यन्ता मे हवं नासत्योप यातम् ॥

युवाम्। गोतमः। पुरुऽमीळ्हः। अत्रिः। दस्रा। हवते। अवसे। हविष्मान्। दिशम्। न। दिष्टाम्। ऋजुयाऽइव। यन्ता। आ। मे। हवम्। नासत्या। उप। यातम् ॥ १.१८३.५

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 29 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (दस्रा) दुःख दारिद्र्य विनाशनेहारे (नासत्या) सत्यप्रिय शिल्पविद्याऽध्यापकोपदेशक विद्वानो ! (युवाम्) तुम दोनों (यः) जो (हविष्मान्) प्रशंसित ग्रहण करने योग्य (पुरुमीढः) बहुत पदार्थों से सींचा हुआ (अत्रिः) निरन्तर गमनशील (गोतमः) मेधावी जन (अवसे) रक्षा आदि के लिये (हवते) उत्तम पदार्थों को ग्रहण करता है वैसे और जैसे (यन्ता) नियमकर्त्ता जन (ऋजूयेव) सरल मार्ग से जैसे तैसे (दिष्टाम्) निर्द्देश की (दिशम्) पूर्वादि दिशा के (न) समान (मे) मेरे (हवम्) दान को (उप, आ, यातम्) अच्छे प्रकार समीप प्राप्त होओ ॥ ५ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे नौकादि यान से जानेवाले जन सरल मार्ग से बताई हुई दिशा को जाते हैं, वैसे सीखनेवाले विद्यार्थी जन आप्त विद्वानों के समीप जावें ॥ ५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।