Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 181 / Mantra 5

191 Sukta
9 Mantra
1/181/5
Devata- अश्विनौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्र वां॑ निचे॒रुः क॑कु॒हो वशाँ॒ अनु॑ पि॒शङ्ग॑रूप॒: सद॑नानि गम्याः। हरी॑ अ॒न्यस्य॑ पी॒पय॑न्त॒ वाजै॑र्म॒थ्रा रजां॑स्यश्विना॒ वि घोषै॑: ॥

प्र । वा॒म् । नि॒ऽचे॒रुः । क॒कु॒हः । वशा॑न् । अनु॑ । पि॒शङ्ग॑ऽरूपः । सद॑नानि । ग॒म्याः॒ । हरी॑ । अ॒न्यस्य॑ । पी॒पय॑न्त । वाजैः॑ । म॒थ्ना । रजां॑सि । अ॒श्वि॒ना॒ । वि । घोषैः॑ ॥

Mantra without Swara
प्र वां निचेरुः ककुहो वशाँ अनु पिशङ्गरूप: सदनानि गम्याः। हरी अन्यस्य पीपयन्त वाजैर्मथ्रा रजांस्यश्विना वि घोषै: ॥

प्र। वाम्। निऽचेरुः। ककुहः। वशान्। अनु। पिशङ्गऽरूपः। सदनानि। गम्याः। हरी। अन्यस्य। पीपयन्त। वाजैः। मथ्ना। रजांसि। अश्विना। वि। घोषैः ॥ १.१८१.५

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 25 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अश्विना) पवन और सूर्य के समान अध्यापक और उपदेशको ! जिन (वाम्) तुम्हारा जैसे (पिशङ्गरूपः) पीला सुवर्ण आदि से मिला हुआ रूप है जिसका वह (ककुहः) सब दिशाओं को (निचेरुः) विचरनेवाला (वशान्) वशवर्त्ति जनों को (अनु) अनुकूल वर्त्तता है उन में से प्रत्येक तुम (सदनानि) लोकों को (प्र, गम्याः) अच्छे प्रकार प्राप्त होओ जैसे (अन्यस्य) और अर्थात् अपने से भिन्न पदार्थ की (हरी) धारण और आकर्षण के समान बल, पराक्रम (वाजैः) वेगादि गुणों और (घोषैः) शब्दों से (मथ्ना) अच्छे प्रकार मथे हुए (रजांसि) लोकों को बढ़ाते हैं, वैसे मनुष्य उनको (वि, पीपयन्त) विशेष कर परिपूर्ण करते हैं ॥ ५ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे पवन सबको अपने वश में करता है तथा वायु और सूर्य लोक सबको धारण करते हैं, वैसे विद्या धर्म्म को धारण कर तुम भी सुखी होओ ॥ ५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।