Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 180 / Mantra 2

191 Sukta
10 Mantra
1/180/2
Devata- अश्विनौ Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
यु॒वमत्य॒स्याव॑ नक्षथो॒ यद्विप॑त्मनो॒ नर्य॑स्य॒ प्रय॑ज्योः। स्वसा॒ यद्वां॑ विश्वगूर्ती॒ भरा॑ति॒ वाजा॒येट्टे॑ मधुपावि॒षे च॑ ॥

यु॒वम् । अत्य॑स्य । अव॑ । न॒क्ष॒थः॒ । यत् । विऽप॑त्मनः । नर्य॑स्य । प्रऽय॑ज्योः । स्वसा॑ । यत् । वा॒म् । वि॒श्व॒गू॒र्ती॒ इति॑ विश्वऽगूर्ती । भरा॑ति । वाजा॑य । ईट्टे॑ । म॒धु॒ऽपौ॒ । इ॒षे । च॒ ॥

Mantra without Swara
युवमत्यस्याव नक्षथो यद्विपत्मनो नर्यस्य प्रयज्योः। स्वसा यद्वां विश्वगूर्ती भराति वाजायेट्टे मधुपाविषे च ॥

युवम्। अत्यस्य। अव। नक्षथः। यत्। विऽपत्मनः। नर्यस्य। प्रऽयज्योः। स्वसा। यत्। वाम्। विश्वगूर्ती इति विश्वऽगूर्ती। भराति। वाजाय। ईट्टे। मधुऽपौ। इषे। च ॥ १.१८०.२

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 23 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे स्त्रीपुरुषौ ! (यत्) जो (युवम्) तुम दोनों (प्रयज्योः) प्रयोग करने योग्य अर्थात् कार्य्य संचार में वर्त्तने योग्य (नर्यस्य) मनुष्यों में उत्तम (विपत्मनः) विशेष चलनेवाले (अत्यस्य) घोड़े को (अव, नक्षथः) प्राप्त होते हो (यत्) जिस (विश्वगूर्त्ती) समस्त उद्यम के करनेवालो (वाम्) तुम दोनों को (स्वसा) बहिन तुम्हारी (भराति) पाले-पोषे (वाजाय, च) और विज्ञान होने के लिये (ईट्टे) तुम दोनों की स्तुति करती अर्थात् प्रशंसा करती वे (मधुपौ) मधुर मीठे को पीते हुए तुम दोनों (इषे) अन्नादि पदार्थों के होने के लिए उत्तम यत्न करो ॥ २ ॥
Essence
जो स्त्री-पुरुष अग्नि आदि पदार्थों को शीघ्रगामी करने की विद्या को जानें तो यथेष्ट स्थान को जा सकते हैं, जिसकी बहिन पण्डिता हो उसकी प्रशंसा क्यों न हो ? ॥ २ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.