Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 18 / Mantra 5

191 Sukta
9 Mantra
1/18/5
Devata- ब्रह्मणस्पतिसोमेन्द्रदक्षिणाः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं तं ब्र॑ह्मणस्पते॒ सोम॒ इन्द्र॑श्च॒ मर्त्य॑म्। दक्षि॑णा पा॒त्वंह॑सः॥

त्वम् । तम् । ब्र॒ह्म॒णः॒ । प॒ते॒ । सोमः॑ । इन्द्रः॑ । च॒ । मर्त्य॑म् । दक्षि॑णा । पा॒तु॒ । अंह॑सः ॥

Mantra without Swara
त्वं तं ब्रह्मणस्पते सोम इन्द्रश्च मर्त्यम्। दक्षिणा पात्वंहसः॥

त्वम्। तम्। ब्रह्मणः। पते। सोमः। इन्द्रः। च। मर्त्यम्। दक्षिणा। पातु। अंहसः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 34 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (ब्रह्मणस्पते) ब्रह्माण्ड के पालन करनेवाले जगदीश्वर ! (त्वम्) आप (अहंसः) पापों से जिसकी (पातु) रक्षा करते हैं, (तम्) उस धर्मात्मा यज्ञ करनेवाले (मर्त्यम्) विद्वान् मनुष्य की (सोमः) सोमलता आदि ओषधियों के रस (इन्द्रः) वायु और (दक्षिणा) जिससे वृद्धि को प्राप्त होते हैं, ये सब (पातु) रक्षा करते हैं॥५॥
Essence
जो मनुष्य अधर्म से दूर रहकर अपने सुखों के बढ़ाने की इच्छा करते हैं, वे ही परमेश्वर के सेवक और उक्त सोम, इन्द्र और दक्षिणा इन पदार्थों को युक्ति के साथ सेवन कर सकते हैं॥५॥
Subject
कैसे वे रक्षा करनेवाले होते हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-