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Rigveda Mandal 1 / Sukta 179 / Mantra 6

191 Sukta
6 Mantra
1/179/6
Devata- दम्पती Rishi- लोपमुद्राऽगस्त्यौ Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒गस्त्य॒: खन॑मानः ख॒नित्रै॑: प्र॒जामप॑त्यं॒ बल॑मि॒च्छमा॑नः। उ॒भौ वर्णा॒वृषि॑रु॒ग्रः पु॑पोष स॒त्या दे॒वेष्वा॒शिषो॑ जगाम ॥

अ॒गस्त्यः॑ । खन॑मानः । ख॒नित्रैः॑ । प्र॒ऽजाम् । अप॑त्यम् । बल॑म् । इ॒च्छमा॑नः । उ॒भौ । वर्णौ॑ । ऋषिः॑ । उ॒ग्रः । पु॒पो॒ष॒ । स॒त्याः । दे॒वेषु । आ॒ऽशिषः॑ । ज॒गा॒म॒ ॥

Mantra without Swara
अगस्त्य: खनमानः खनित्रै: प्रजामपत्यं बलमिच्छमानः। उभौ वर्णावृषिरुग्रः पुपोष सत्या देवेष्वाशिषो जगाम ॥

अगस्त्यः। खनमानः। खनित्रैः। प्रऽजाम्। अपत्यम्। बलम्। इच्छमानः। उभौ। वर्णौ। ऋषिः। उग्रः। पुपोष। सत्याः। देवेषु। आऽशिषः। जगाम ॥ १.१७९.६

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 22 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
जैसे (खनित्रैः) कुद्दाल, फाँवड़ा, कसी आदि खोदने के साधनों से भूमि को (खनमानः) खोदता हुआ खेती करनेवाला धान्य आदि अनाज पाके सुखी होता है वैसे ब्रह्मचर्य और विद्या से (प्रजाम्) राज्य (अपत्यम्) सन्तान और (बलम्) बल की (इच्छमानः) इच्छा करता हुआ (अगस्त्यः) निरपराधियों में उत्तम (ऋषिः) वेदार्थवेत्ता (उग्रः) तेजस्वी विद्वान् (पुपोष) पुष्ट होता है (देवेषु) और विद्वानों में वा कामों में (सत्याः) अच्छे कर्मों में उत्तम सत्य और (आशिषः) सिद्ध इच्छाओं को (जगाम) प्राप्त होता है वैसे (उभौ) दोनों (वर्णौ) परस्पर एक दूसरे का स्वीकार करते हुए स्त्री-पुरुष होवें ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जैसे कृषि करनेवाले अच्छे खेतों में उत्तम बीजों को बोय कर फलवान् होते हैं और जैसे धार्मिक विद्वान् जन सत्य कामों को प्राप्त होते हैं वैसे ब्रह्मचर्य से युवावस्था को प्राप्त होकर अपनी इच्छा से विवाह करें वे अच्छे खेत में उत्तम बीज सम्बन्धी के समान फलवान् होते हैं ॥ ६ ॥इस सूक्त में विदुषी स्त्री और विद्वान् पुरुषों के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पिछले सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति है, यह जानना चाहिये ॥यह एकसौ उनासीवाँ सूक्त बाईसवाँ वर्ग और तेईसवाँ अनुवाक समाप्त हुआ ॥
Subject
अब सन्तानोत्पत्तिविषय को अगले मन्त्र में कहा है ।