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Rigveda Mandal 1 / Sukta 179 / Mantra 4

191 Sukta
6 Mantra
1/179/4
Devata- दम्पती Rishi- लोपमुद्राऽगस्त्यौ Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
न॒दस्य॑ मा रुध॒तः काम॒ आग॑न्नि॒त आजा॑तो अ॒मुत॒: कुत॑श्चित्। लोपा॑मुद्रा॒ वृष॑णं॒ नी रि॑णाति॒ धीर॒मधी॑रा धयति श्व॒सन्त॑म् ॥

न॒दस्य॑ । मा॒ । रु॒ध॒तः । कामः॑ । आ । अ॒ग॒न् । इ॒तः । आऽजा॑तः । अ॒मुतः॑ । कुतः॑ । चि॒त् । लोपा॑मुद्रा । वृष॑णम् । निः । रि॒णा॒ति॒ । धीर॑म् । अधी॑रा । ध॒य॒ति॒ । श्व॒सन्त॑म् ॥

Mantra without Swara
नदस्य मा रुधतः काम आगन्नित आजातो अमुत: कुतश्चित्। लोपामुद्रा वृषणं नी रिणाति धीरमधीरा धयति श्वसन्तम् ॥

नदस्य। मा। रुधतः। कामः। आ। अगन्। इतः। आऽजातः। अमुतः। कुतः। चित्। लोपामुद्रा। वृषणम्। निः। रिणाति। धीरम्। अधीरा। धयति। श्वसन्तम् ॥ १.१७९.४

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 22 Mantra » 4

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Meaning
(इतः) इधर से वा (अमुतः) उधर से वा (कुतश्चित्) कहीं से (आजातः) सब ओर से प्रसिद्ध (रुधतः) वीर्य रोकने वा (नदस्य) अव्यक्त शब्द करनेवाले वृषभ आदि का (कामः) काम (मा) मुझको (आगन्) प्राप्त होता अर्थात् उनके सदृश कामदेव उत्पन्न होता है। और (अधीरा) धीरज से रहित वा (लोपामुद्रा) लोप होजाना लुकि जाना ही प्रतीत का चिह्न है जिसका सो यह स्त्री (वृषणम्) वीर्यवान् (धीरम्) धीरजयुक्त (श्वसन्तम्) श्वासें लेते हुए अर्थात् शयनादि दशा में निमग्न पुरुष को (नीरिणति) निरन्तर प्राप्त होती और (धयति) उससे गमन भी करती है ॥ ४ ॥
Essence
जो विद्या धैर्य आदि रहित स्त्रियों को विवाहते हैं वे सुख नहीं पाते हैं। जो पुरुष कामरहित कन्या को वा कामरहित पुरुष को कुमारी विवाहे वहाँ कुछ भी सुख नहीं होता, इससे परस्पर प्रीतिवाले गुणों में समान स्त्री-पुरुष विवाह करें, वहाँ ही मङ्गल समाचार है ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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