Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 173 / Mantra 4

191 Sukta
13 Mantra
1/173/4
Devata- इन्द्र: Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
ता क॒र्माष॑तरास्मै॒ प्र च्यौ॒त्नानि॑ देव॒यन्तो॑ भरन्ते। जुजो॑ष॒दिन्द्रो॑ द॒स्मव॑र्चा॒ नास॑त्येव॒ सुग्म्यो॑ रथे॒ष्ठाः ॥

ता । क॒र्म॒ । अष॑ऽतरा । अ॒स्मै॒ । प्र । च्यौ॒त्नानि॑ । दे॒व॒ऽयन्तः॑ । भ॒र॒न्ते॒ । जुजो॑षत् । इन्द्रः॑ । द॒स्मऽव॑र्चाः । नास॑त्याऽइव । सुग्म्यः॑ । र॒थे॒ऽस्थाः ॥

Mantra without Swara
ता कर्माषतरास्मै प्र च्यौत्नानि देवयन्तो भरन्ते। जुजोषदिन्द्रो दस्मवर्चा नासत्येव सुग्म्यो रथेष्ठाः ॥

ता। कर्म। अषऽतरा। अस्मै। प्र। च्यौत्नानि। देवऽयन्तः। भरन्ते। जुजोषत्। इन्द्रः। दस्मऽवर्चाः। नासत्याऽइव। सुग्म्यः। रथेऽस्थाः ॥ १.१७३.४

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 13 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (देवयन्तः) अपने को विद्वानों की इच्छा करनेवाले सज्जन (अस्मै) जिन (अषतरा) अतीव प्राप्त पदार्थों और (च्यौत्नानि) इस आगे कहने योग्य ऐश्वर्य चाहनेवाले सभापति आदि के लिये स्तुतियों को (प्र, भरन्ते) उत्तमता से धारण करते हैं (ता) उनको (दस्मवर्चाः) शत्रुओं में जिसका पराक्रम वर्त्त रहा है वह (सुग्म्यः) सुख साधन पदार्थों में उत्तम (रथेष्ठाः) रथ में बैठनेवाला (इन्द्रः) ऐश्वर्य चाहता हुआ (नासत्येव) सूर्य और चन्द्रमा के समान (जुजोषत्) सेवे वैसे हम लोग (कर्म) करें ॥ ४ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जो सूर्य-चन्द्रमा के समान शुभ गुण, कर्म, स्वभावों से प्रकाशित, आप्त शास्त्रज्ञ धर्मात्माओं के तुल्य आचरण करते हैं, वे क्या-क्या सुख नहीं पाते हैं ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।