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Rigveda Mandal 1 / Sukta 17 / Mantra 4

191 Sukta
9 Mantra
1/17/4
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यु॒वाकु॒ हि शची॑नां यु॒वाकु॑ सुमती॒नाम्। भू॒याम॑ वाज॒दाव्ना॑म्॥

यु॒वाकु॑ । हि । शची॑नाम् । यु॒वाकु॑ । सु॒ऽम॒ती॒नाम् । भू॒याम॑ । वा॒ज॒दाव्ना॑म् ॥

Mantra without Swara
युवाकु हि शचीनां युवाकु सुमतीनाम्। भूयाम वाजदाव्नाम्॥

युवाकु। हि। शचीनाम्। युवाकु। सुऽमतीनाम्। भूयाम। वाजदाव्नाम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 32 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हम लोग (हि) जिस कारण (शचीनाम्) उत्तम वाणी वा श्रेष्ठ कर्मों के (युवाकु) मेल तथा (वाजदाव्नाम्) विद्या वा अन्न के उपदेश करने वा देने और (सुमतीनाम्) श्रेष्ठ बुद्धिवाले विद्वानों के (युवाकु) पृथग्भाव करने को (भूयाम) समर्थ होवें, इस कारण से इनको साधें॥४॥
Essence
मनुष्यों को सदा आलस्य छोड़कर अच्छे कामों का सेवन तथा विद्वानों का समागम नित्य करना चाहिये, जिससे अविद्या और दरिद्रपन जड़-मूल से नष्ट हों॥४॥
Subject
उक्त कार्य्य के करने से क्या होता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-

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