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Rigveda Mandal 1 / Sukta 168 / Mantra 5

191 Sukta
10 Mantra
1/168/5
Devata- मरुतः Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
को वो॒ऽन्तर्म॑रुत ऋष्टिविद्युतो॒ रेज॑ति॒ त्मना॒ हन्वे॑व जि॒ह्वया॑। ध॒न्व॒च्युत॑ इ॒षां न याम॑नि पुरु॒प्रैषा॑ अह॒न्यो॒३॒॑ नैत॑शः ॥

कः । वः॒ । अ॒न्तः । म॒रु॒तः॒ । ऋ॒ष्टि॒ऽवि॒द्यु॒तः॒ । रेज॑ति । त्मना॑ । हन्वा॑ऽइव । जि॒ह्वया॑ । ध॒न्व॒ऽच्युतः॑ । इ॒षाम् । न । याम॑नि । पु॒रु॒ऽप्रैषाः॑ । अ॒ह॒न्यः॑ । न । एत॑शः ॥

Mantra without Swara
को वोऽन्तर्मरुत ऋष्टिविद्युतो रेजति त्मना हन्वेव जिह्वया। धन्वच्युत इषां न यामनि पुरुप्रैषा अहन्यो३ नैतशः ॥

कः। वः। अन्तः। मरुतः। ऋष्टिऽविद्युतः। रेजति। त्मना। हन्वाऽइव। जिह्वया। धन्वऽच्युतः। इषाम्। न। यामनि। पुरुऽप्रैषाः। अहन्यः। न। एतशः ॥ १.१६८.५

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 6 Mantra » 5

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Meaning
हे (पुरुप्रैषाः) बहुतों से प्रेरणा को प्राप्त (ऋष्टिविद्युतः) ऋष्टि-द्विधारा खड्ग को बिजुली के समान तीव्र रखनेवाले (मरुतः) विद्वानो ! (वः) तुम्हारे (अन्तः) बीच में (कः) कौन (रेजति) कम्पता है और (जिह्वया) वाणी से (हन्वेव) कनफटी जैसे डुलाई जावें वैसे (त्मना) अपने से कौन तुम्हारे बीच में कम्पता है (इषाम्) और इच्छाओं के सम्बन्ध में (धन्वच्युतः) अन्तरिक्ष में प्राप्त मेघों के (न) समान वा (अहन्यः) दिन में प्रसिद्ध होनेवाले (एतशः) घोड़े के (न) समान (यामनि) मार्ग में तुम लोगों को कौन संयुक्त करता है ॥ ५ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जब जिज्ञासु जन विद्वानों के प्रति पूछें तब विद्वान् जन इनके लिये यथार्थ उत्तर देवें ॥ ५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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