Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 167 / Mantra 8

191 Sukta
11 Mantra
1/167/8
Devata- इन्द्रो मरुच्च Rishi- अगस्त्यो मैत्रावरुणिः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
पान्ति॑ मि॒त्रावरु॑णावव॒द्याच्चय॑त ईमर्य॒मो अप्र॑शस्तान्। उ॒त च्य॑वन्ते॒ अच्यु॑ता ध्रु॒वाणि॑ ववृ॒ध ईं॑ मरुतो॒ दाति॑वारः ॥

पान्ति॑ । मि॒त्रावरु॑णौ । अ॒व॒द्यात् । चय॑ते । ई॒म् । अ॒र्य॒मो इति॑ । अप्र॑ऽशस्तान् । उ॒त । च्य॒व॒न्ते॒ । अच्यु॑ता । ध्रु॒वाणि॑ । व॒वृ॒धे । ई॒म् । म॒रु॒तः॒ । दाति॑ऽवारः ॥

Mantra without Swara
पान्ति मित्रावरुणाववद्याच्चयत ईमर्यमो अप्रशस्तान्। उत च्यवन्ते अच्युता ध्रुवाणि ववृध ईं मरुतो दातिवारः ॥

पान्ति। मित्रावरुणौ। अवद्यात्। चयते। ईम्। अर्यमो इति। अप्रऽशस्तान्। उत। च्यवन्ते। अच्युता। ध्रुवाणि। ववृधे। ईम्। मरुतः। दातिऽवारः ॥ १.१६७.८

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 5 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) विद्वानो ! आप लोग और (मित्रावरुणौ) मित्र और श्रेष्ठ सज्जन वा अध्यापक और उपदेशक जन (अवद्यात्) निन्द्यपापाचरण से (पान्ति) मनुष्यों की रक्षा करते हैं तथा (अर्यमो) न्याय करनेवाला राजा (अप्रशस्तान्) दुराचारी जनों को (ईम्) प्रत्यक्ष (चयते) इकट्ठा करता है (उत) और वे (अच्युता) विनाशरहित (ध्रुवाणि) ध्रुव दृढ़ कामों को (च्यवन्ते) प्राप्त होते हैं और (दातिवारः) दान को लेनेवाला (ईम्) सब ओर से (ववृधे) बढ़ता है ॥ ८ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो मनुष्य विद्या, धर्म और उत्तम शिक्षा के देने से अज्ञानियों को अधर्म से निवृत्त कर ध्रुव शुभ गुण और कर्मों को प्राप्त कराते हैं, वे सुख से अलग नहीं होते ॥ ८ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.