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Rigveda Mandal 1 / Sukta 166 / Mantra 9

191 Sukta
15 Mantra
1/166/9
Devata- मरुतः Rishi- मैत्रावरुणोऽगस्त्यः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
विश्वा॑नि भ॒द्रा म॑रुतो॒ रथे॑षु वो मिथ॒स्पृध्ये॑व तवि॒षाण्याहि॑ता। अंसे॒ष्वा व॒: प्रप॑थेषु खा॒दयोऽक्षो॑ वश्च॒क्रा स॒मया॒ वि वा॑वृते ॥

विश्वा॑नि । भ॒द्रा । म॒रु॒तः॒ । रथे॑षु । वः॒ । मि॒थ॒स्पृध्या॑ऽइव । त॒वि॒षाणि॑ । आऽहि॑ता । अंसे॑षु । आ । वः॒ । प्रऽप॑थेषु । खा॒दयः॑ । अक्षः॑ । वः॒ । च॒क्रा । स॒मया॑ । वि । व॒वृ॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
विश्वानि भद्रा मरुतो रथेषु वो मिथस्पृध्येव तविषाण्याहिता। अंसेष्वा व: प्रपथेषु खादयोऽक्षो वश्चक्रा समया वि वावृते ॥

विश्वानि। भद्रा। मरुतः। रथेषु। वः। मिथस्पृध्याऽइव। तविषाणि। आऽहिता। अंसेषु। आ। वः। प्रऽपथेषु। खादयः। अक्षः। वः। चक्रा। समया। वि। ववृते ॥ १.१६६.९

Ashtak » 2 Adhyay » 4 Varga » 2 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) पवनों के समान वली सज्जनो ! (वः) तुम्हारे (रथेषु) रमणीय यानों में (विश्वानि) समस्त (भद्रा) कल्याण करनेवाले (मिथस्पृध्येव) संग्रामों में जैसे परस्पर सेना है वैसे (तविषाणि) बल (आहिता) सब ओर से धरे हुए हैं (वः) तुम्हारे (अंसेषु) स्कन्धों में उक्त बल है तथा (प्रपथेषु) उत्तम सीधे मार्गों में (खादयः) खाने योग्य विशेष भक्ष्य भोज्य पदार्थ हैं (वः) तुम्हारे (अक्षः) रथ का अक्षभाग धुरी (चक्रा) पहियों के (समया) समीप (आ, वि, ववृते) विविध प्रकार से प्रत्यक्ष वर्त्तमान है ॥ ९ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो आप बलवान्, कल्याण के आचरण करनेवाले, सुमार्गगामी, परिपूर्ण धन सेनादि सहित हैं, वे प्रत्यक्ष शत्रुओं को जीत सकते हैं ॥ ९ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।