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Rigveda Mandal 1 / Sukta 165 / Mantra 15

191 Sukta
15 Mantra
1/165/15
Devata- इन्द्र: Rishi- अगस्त्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए॒ष व॒: स्तोमो॑ मरुत इ॒यं गीर्मा॑न्दा॒र्यस्य॑ मा॒न्यस्य॑ का॒रोः। एषा या॑सीष्ट त॒न्वे॑ व॒यां वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥

ए॒षः । वः॒ । स्तोमः॑ । म॒रु॒तः॒ । इ॒यम् । गीः । मा॒न्दा॒र्यस्य॑ । मा॒न्यस्य॑ । का॒रोः । आ । इ॒षा । या॒सी॒ष्ट॒ । त॒न्वे॑ । व॒याम् । वि॒द्याम॑ । इ॒षम् । वृ॒जन॑म् । जी॒रऽदा॑नुम् ॥

Mantra without Swara
एष व: स्तोमो मरुत इयं गीर्मान्दार्यस्य मान्यस्य कारोः। एषा यासीष्ट तन्वे वयां विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम् ॥

एषः। वः। स्तोमः। मरुतः। इयम्। गीः। मान्दार्यस्य। मान्यस्य। कारोः। आ। इषा। यासीष्ट। तन्वे। वयाम्। विद्याम। इषम्। वृजनम्। जीरऽदानुम् ॥ १.१६५.१५

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) उत्तम विद्वानो ! (एषः) यह (वः) तुम लोगों के लिये (स्तोमः) स्तुतियों का समूह और (मान्दार्यस्य) स्तुति के योग्य वा उत्तम गुण, कर्म, स्वभाववाले (मान्यस्य) मानने योग्य (कारोः) कार (=कार्य) करनेवाले पुरुषार्थी जन की (इयम्) यह (गीः) वाणी है इससे तुम में से प्रत्येक (तन्वे) बढ़ाने के लिये (इषा) इच्छा के साथ (आ, यासीष्ट) आओ, प्राप्त होओ (वयाम्) और हम लोग (इषम्) अन्न (वृजनम्) बल (जीरदानुम्) और जीवन को (विद्याम) प्राप्त होवें ॥ १५ ॥
Essence
जो आप्त, शास्त्रज्ञ, धर्मात्मा, पुरुषार्थी, विद्वान् पुरुषों की उत्तेजना से विद्या और शिक्षा को प्राप्त होकर धर्मयुक्त व्यवहार का आचरण करते हैं, उनके जन्म की सफलता है यह जानना चाहिये ॥ १५ ॥इस सूक्त में विद्वानों के गुणों के वर्णन से इस सूक्त के अर्थ की पिछले सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥यह एकसौ पैंसठवाँ सूक्त और छब्बीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥इस अध्याय में वसु रुद्रादिकों के अर्थों का प्रतिपादन होने से इस अध्याय में कहे हुए अर्थों की पिछले अध्याय में कहे अर्थों के साथ सङ्गति वर्त्तमान है, यह जानना चाहिये ॥इति श्रीयुत परमहंसपरिव्राजकाचार्य्याणां परमविदुषां श्रीमद्विरजानन्दसरस्वतीस्वामिनां शिष्येण श्रीपरमहंसपरिव्राजकाचार्येण श्रीमद्दयानन्दसरस्वतीस्वामिना निर्मिते संस्कृतार्यभाषाभ्यां सुभूषिते सुप्रमाणयुक्त ऋग्वेदभाष्ये द्वितीयाष्टके तृतीयोऽध्यायः समाप्तः ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।