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Rigveda Mandal 1 / Sukta 164 / Mantra 24

191 Sukta
52 Mantra
1/164/24
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
गा॒य॒त्रेण॒ प्रति॑ मिमीते अ॒र्कम॒र्केण॒ साम॒ त्रैष्टु॑भेन वा॒कम्। वा॒केन॑ वा॒कं द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा॒क्षरे॑ण मिमते स॒प्त वाणी॑: ॥

गा॒य॒त्रेण॑ । प्रति॑ । मि॒मी॒ते॒ । अ॒र्कम् । अ॒र्केण॑ । साम॑ । त्रैस्तु॑भेन । वा॒कम् । वा॒केन॑ । वा॒कम् । द्वि॒ऽपदा॑ । चतुः॑ऽपदा । अ॒क्षरे॑ण । मि॒म॒ते॒ । स॒प्त । वाणीः॑ ॥

Mantra without Swara
गायत्रेण प्रति मिमीते अर्कमर्केण साम त्रैष्टुभेन वाकम्। वाकेन वाकं द्विपदा चतुष्पदाक्षरेण मिमते सप्त वाणी: ॥

गायत्रेण। प्रति। मिमीते। अर्कम्। अर्केण। साम। त्रैस्तुभेन। वाकम्। वाकेन। वाकम्। द्विऽपदा। चतुःऽपदा। अक्षरेण। मिमते। सप्त। वाणीः ॥ १.१६४.२४

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 18 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! जो जगदीश्वर (गायत्रेण) गायत्री छन्द से (अर्कम्) ऋक् (अर्केण) ऋचाओं के समूह से (साम) साम (त्रैष्टुभेन) त्रिष्टुप्छन्द वा तीन वेदों की विद्याओं को (=की) स्तुतियों से (वाकम्) यजुर्वेद (द्विपदा) दो पद जिस में विद्यमान वा (चतुष्पदा) चार पदवाले (अक्षरेण) नाशरहित (वाकेन) यजुर्वेद से (वाकम्) अथर्ववेद और (सप्त) गायत्री आदि सात छन्द युक्त (वाणीः) वेदवाणी को (प्रति, मिमीते) प्रतिमान करता है और जो उसके ज्ञान को (मिमते) मान करते हैं वे कृतकृत्य होते हैं ॥ २४ ॥
Essence
जिस जगदीश्वर ने वेदस्थ अक्षर, पद, वाक्य, छन्द, अध्याय आदि बनाये हैं, उसको सब मनुष्य धन्यवाद देवें ॥ २४ ॥
Subject
फिर ईश्वर विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।