Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 163 / Mantra 13

191 Sukta
13 Mantra
1/163/13
Devata- अश्वोऽग्निः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उप॒ प्रागा॑त्पर॒मं यत्स॒धस्थ॒मर्वाँ॒ अच्छा॑ पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च। अ॒द्या दे॒वाञ्जुष्ट॑तमो॒ हि ग॒म्या अथा शा॑स्ते दा॒शुषे॒ वार्या॑णि ॥

उप॑ । प्र । अ॒गा॒त् । प॒र॒मम् । यत् । स॒धऽस्थ॑म् । अर्वा॑न् । अच्छ॑ । पि॒तर॑म् । मा॒तर॑म् । च॒ । अ॒द्य । दे॒वान् । जुष्ट॑ऽतमः । हि । ग॒म्याः । अथ॑ । आ । शा॒स्ते॒ । दा॒शुषे॑ । वार्या॑णि ॥

Mantra without Swara
उप प्रागात्परमं यत्सधस्थमर्वाँ अच्छा पितरं मातरं च। अद्या देवाञ्जुष्टतमो हि गम्या अथा शास्ते दाशुषे वार्याणि ॥

उप। प्र। अगात्। परमम्। यत्। सधऽस्थम्। अर्वान्। अच्छ। पितरम्। मातरम्। च। अद्य। देवान्। जुष्टऽतमः। हि। गम्याः। अथ। आ। शास्ते। दाशुषे। वार्याणि ॥ १.१६३.१३

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 13 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यत्) जो (देवान्) विद्वान् वा दिव्य भोग और गुणों को (जुष्टतमः) अतीव सेवता हुआ (अर्वान्) अग्नि आदि पदार्थरूपी घोड़ों को (अद्य) आज के दिन (परमम्) उत्तम (सधस्थम्) एक साथ के स्थान को (मातरम्) उत्पन्न करनेवाली माता (पितरं, च) और जन्म करानेवाले पिता वा अध्यापक को (अच्छ, उप, प्रागात्) अच्छे प्रकार सब ओर से प्राप्त होता (अथ) अथवा (दाशुषे) देनेवाले के लिये (वार्य्याणि) स्वीकार करने योग्य सुख और (हि) निश्चय से (गम्याः) गमन करने योग्य प्यारी स्त्रियों वा प्राप्त होने योग्य क्रियाओं की (आ, शास्ते) आज्ञा करता है, वह अत्यन्त सुख को प्राप्त होता है ॥ १३ ॥
Essence
जो माता, पिता और आचार्य से शिक्षा पाये प्रशंसित स्थानों के निवासी विद्वानों के सङ्ग की प्रीति रखनेवाले सबके सुख देनेवाले वर्त्तमान हैं, वे यहाँ उत्तम आनन्द को प्राप्त होते हैं ॥ १३ ॥इस सूक्त में विद्वान् और बिजुली के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पिछले सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥यह एकसौ तिरेसठवाँ सूक्त और तेरहवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।