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Rigveda Mandal 1 / Sukta 162 / Mantra 13

191 Sukta
22 Mantra
1/162/13
Devata- मित्रादयो लिङ्गोक्ताः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
यन्नीक्ष॑णं मां॒स्पच॑न्या उ॒खाया॒ या पात्रा॑णि यू॒ष्ण आ॒सेच॑नानि। ऊ॒ष्म॒ण्या॑पि॒धाना॑ चरू॒णाम॒ङ्काः सू॒नाः परि॑ भूष॒न्त्यश्व॑म् ॥

यत् । नि॒ऽईक्ष॑णम् । मां॒स्पच॑न्याः । उ॒खायाः॑ । या । पात्रा॑णि । यू॒ष्णः । आ॒ऽसेच॑नानि । ऊ॒ष्म॒ण्या॑ । अ॒पि॒ऽधाना॑ । च॒रू॒णाम् । अ॒ङ्काः । सू॒नाः । परि॑ । भू॒ष॒न्ति॒ । अश्व॑म् ॥

Mantra without Swara
यन्नीक्षणं मांस्पचन्या उखाया या पात्राणि यूष्ण आसेचनानि। ऊष्मण्यापिधाना चरूणामङ्काः सूनाः परि भूषन्त्यश्वम् ॥

यत्। निऽईक्षणम्। मांस्पचन्याः। उखायाः। या। पात्राणि। यूष्णः। आऽसेचनानि। ऊष्मण्या। अपिऽधाना। चरूणाम्। अङ्काः। सूनाः। परि। भूषन्ति। अश्वम् ॥ १.१६२.१३

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 9 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(यत्) जो (मांस्पचन्याः) मांसाहारी जिसमें मांस पकाते हैं उस (उखायाः) पाक सिद्ध करनेवाली बटलोई का (नीक्षणम्) निरन्तर देखना करते उसमें वैमनस्य कर (या) जो (यूष्णः) रस के (आसेचनानि) अच्छे प्रकार सेचन के आधार वा (पात्राणि) पात्र वा (ऊष्मण्या) गरमपन उत्तम पदार्थ (अपिधाना) बटलोइयों के मुख ढापने की ढकनियाँ (चरूणाम्) अन्न आदि के पकाने के आधार बटलोई कड़ाही आदि वर्त्तनों के (अङ्काः) लक्षण हैं उनको अच्छे जानते और (अश्वम्) घोड़े को (परिभूषन्ति) सुशोभित करते हैं वे (सूनाः) प्रत्येक काम में प्रेरित होते हैं ॥ १३ ॥
Essence
जो मनुष्य मांसादि के पकाने के दोष से रहित बटलोई के धरने, जल आदि उस में छोड़ने, अग्नि को जलाने और उसको ढकनों से ढाँपने को जानते हैं, वे पाकविद्या में कुशल होते हैं। जो घोड़ा को अच्छा सिखा उनको सुशोभित कर चलाते हैं, वे सुख से मार्ग को जाते हैं ॥ १३ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।