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Rigveda Mandal 1 / Sukta 161 / Mantra 9

191 Sukta
14 Mantra
1/161/9
Devata- ऋभवः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- स्वराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आपो॒ भूयि॑ष्ठा॒ इत्येको॑ अब्रवीद॒ग्निर्भूयि॑ष्ठ॒ इत्य॒न्यो अ॑ब्रवीत्। व॒ध॒र्यन्तीं॑ ब॒हुभ्य॒: प्रैको॑ अब्रवीदृ॒ता वद॑न्तश्चम॒साँ अ॑पिंशत ॥

आपः॑ । भूयि॑ष्ठाः । इति॑ । एकः॑ । अ॒ब्र॒वी॒त् । अ॒ग्निः । भूयि॑ष्ठः । इति॑ । अ॒न्यः । अ॒ब्र॒वी॒त् । व॒धः॒ऽयन्ती॑म् । ब॒हुऽभ्यः॑ । प्र । एकः॑ । अ॒ब्र॒वी॒त् । ऋ॒ता । वद॑न्तः । च॒म॒सान् । अ॒पिं॒श॒त॒ ॥

Mantra without Swara
आपो भूयिष्ठा इत्येको अब्रवीदग्निर्भूयिष्ठ इत्यन्यो अब्रवीत्। वधर्यन्तीं बहुभ्य: प्रैको अब्रवीदृता वदन्तश्चमसाँ अपिंशत ॥

आपः। भूयिष्ठाः। इति। एकः। अब्रवीत्। अग्निः। भूयिष्ठः। इति। अन्यः। अब्रवीत्। वधःऽयन्तीम्। बहुऽभ्यः। प्र। एकः। अब्रवीत्। ऋता। वदन्तः। चमसान्। अपिंशत ॥ १.१६१.९

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 5 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम जैसे (एकः) एक पुरुष संयुक्त पृथिवी आदि पदार्थों में (आपः) जल (भूयिष्ठा) अधिक हैं (इति) ऐसा (अब्रवीत्) कहता है (अन्यः) और दूसरा (अग्निः) अग्नि (भूयिष्ठः) अधिक है (इति) ऐसा (प्राब्रवीत्) उत्तमता से कहता है तथा (एकः) कोई (बहुभ्यः) बहुत पदार्थों में (वधर्यन्तीम्) बढ़ती हुई भूमि को अधिक (अब्रवीत्) बतलाता है इसी प्रकार (ऋता) सत्य बातों को (वदन्तः) कहनेवाले होते हुए सज्जन (चमसान्) मेघों के समान पदार्थों को (अपिंशत) अलग-अलग करो ॥ ९ ॥
Essence
इस संसार में स्थूल पदार्थों के बीच कोई जल को अधिक, कोई अग्नि को अधिक और कोई भूमि को बड़ी-बड़ी बतलाते हैं। परन्तु स्थूल पदार्थों में भूमि ही अधिक है, इस प्रकार सत्यविज्ञान से मेघ के अवयवों का जो ज्ञान उसके समान सब पदार्थों को अलग-अलग कर सिद्धान्तों की सब परीक्षा करें, इस काम के विना यथार्थ पदार्थविद्या को नहीं जान सकते ॥ ९ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।