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Rigveda Mandal 1 / Sukta 161 / Mantra 2

191 Sukta
14 Mantra
1/161/2
Devata- ऋभवः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
एकं॑ चम॒सं च॒तुर॑: कृणोतन॒ तद्वो॑ दे॒वा अ॑ब्रुव॒न्तद्व॒ आग॑मम्। सौध॑न्वना॒ यद्ये॒वा क॑रि॒ष्यथ॑ सा॒कं दे॒वैर्य॒ज्ञिया॑सो भविष्यथ ॥

एक॑म् । च॒म॒सम् । च॒तुरः॑ । कृ॒णो॒त॒न॒ । तत् । वः॒ । दे॒वाः । अ॒ब्रु॒व॒न् । तत् । वः॒ । आ । अ॒ग॒म॒म् । सौध॑न्वनाः । यदि॑ । ए॒व । क॒रि॒ष्यथ॑ । सा॒कम् । दे॒वैः । य॒ज्ञिया॑सः । भ॒वि॒ष्य॒थ॒ ॥

Mantra without Swara
एकं चमसं चतुर: कृणोतन तद्वो देवा अब्रुवन्तद्व आगमम्। सौधन्वना यद्येवा करिष्यथ साकं देवैर्यज्ञियासो भविष्यथ ॥

एकम्। चमसम्। चतुरः। कृणोतन। तत्। वः। देवाः। अब्रुवन्। तत्। वः। आ। अगमम्। सौधन्वनाः। यदि। एव। करिष्यथ। साकम्। देवैः। यज्ञियासः। भविष्यथ ॥ १.१६१.२

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 4 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सौधन्वनाः) उत्तम धनुषों में कुशल ! जिस (एकम्) इकेले (चमसम्) मेघ को (देवाः) विद्वान् जन (वः) तुम लोगों के प्रति (अब्रुवन्) कहें अर्थात् उसके गुणों का उपदेश करें (तत्) उसको तुम लोग (कृणोतन) करो और जिसको (वः) तुम लोगों की उत्तेजना से मैं (आगमम्) प्राप्त होऊँ (तत्) उसको करो, (यदि) जो (देवैः) विद्वानों के (साकम्) साथ (चतुरः) वायु, अग्नि, जल, भूमि इन चारों को पूछो तो अपने काम को सिद्ध (एव) ही (करिष्यथ) करो और (यज्ञियासः) यज्ञ के अनुष्ठान के योग्य (भविष्यथ) होओ ॥ २ ॥
Essence
जो विद्वानों की उत्तेजना से प्रश्नोत्तरों से विद्याओं को पाकर उसमें कहे हुए कामों को करते हैं वे विद्वान् होते हैं। पिछले प्रश्नों के यहाँ ये उत्तर हैं कि जो हम लोगों में विद्या में अधिक है वह श्रेष्ठ। जो जितेन्द्रिय है वह अत्यन्त बलवान्। जो अग्नि है वह दूत और जो पुरुषार्थसिद्धि है वह विभूति है ॥ २ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।