Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 161 / Mantra 13

191 Sukta
14 Mantra
1/161/13
Devata- ऋभवः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सु॒षु॒प्वांस॑ ऋभव॒स्तद॑पृच्छ॒तागो॑ह्य॒ क इ॒दं नो॑ अबूबुधत्। श्वानं॑ व॒स्तो बो॑धयि॒तार॑मब्रवीत्संवत्स॒र इ॒दम॒द्या व्य॑ख्यत ॥

सु॒षु॒प्वांसः॑ । ऋ॒भ॒वः॒ । तत् । अ॒पृ॒च्छ॒त॒ । अगो॑ह्य । कः । इ॒दम् । नः॒ । अ॒बू॒बु॒ध॒त् । श्वान॑म् । ब॒स्तः । बो॒ध॒यि॒तार॑म् । अ॒ब्र॒वी॒त् । स॒व्ँम्व॒त्स॒रे । इ॒दम् । अ॒द्य । वि । अ॒ख्य॒त॒ ॥

Mantra without Swara
सुषुप्वांस ऋभवस्तदपृच्छतागोह्य क इदं नो अबूबुधत्। श्वानं वस्तो बोधयितारमब्रवीत्संवत्सर इदमद्या व्यख्यत ॥

सुषुप्वांसः। ऋभवः। तत्। अपृच्छत। अगोह्य। कः। इदम्। नः। अबूबुधत्। श्वानम्। वस्तः। बोधयितारम्। अब्रवीत्। सव्ँम्वत्सरे। इदम्। अद्य। वि। अख्यत ॥ १.१६१.१३

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 6 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (सुसुप्वांसः) सोनेवाले (ऋभवः) बुद्धिमान् जनो ! तुम जिस काम को (अपृच्छत) पूछो और जिसको (वि, अख्यत) प्रसिद्ध कहो (तत्, इदम्) उस इस काम को (नः) हम लोगों को (कः) कौन (अबूबुधत्) जनावे। हे (अगोह्य) न गुप्त राखने योग्य (वस्तः) ढाँपने-छिपानेवाला (श्वानम्) कार्य्यों में प्रेरणा देने और (बोधयितारम्) शुभागुण विषय जनानेवाले को जैसे जिस विषय को (अब्रवीत्) कहे वैसे उस (इदम्) प्रत्यक्ष विषय को (संवत्सरे) एक वर्ष में वा (अद्य) आज तू कह ॥ १३ ॥
Essence
बुद्धिमान् जन जिस-जिस विषय को विद्वानों को पूछ कर निश्चय करें उस उस को मूर्ख निर्बुद्धि जन निश्चय नहीं कर सकें, जड़ मन्दमति जन जितना एक संवत्सर में पढ़ता है, उतना बुद्धिमान् एक दिन में ग्रहण कर सकता है ॥ १३ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।