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Rigveda Mandal 1 / Sukta 160 / Mantra 3

191 Sukta
5 Mantra
1/160/3
Devata- द्यावापृथिव्यौ Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स वह्नि॑: पु॒त्रः पि॒त्रोः प॒वित्र॑वान्पु॒नाति॒ धीरो॒ भुव॑नानि मा॒यया॑। धे॒नुं च॒ पृश्निं॑ वृष॒भं सु॒रेत॑सं वि॒श्वाहा॑ शु॒क्रं पयो॑ अस्य दुक्षत ॥

सः । वह्निः॑ । पु॒त्रः । पि॒त्रोः । प॒वित्र॑ऽवान् । पु॒नाति॑ । धीरः॑ । भुव॑नानि । मा॒यया॑ । धे॒नुम् । च॒ । पृश्नि॑म् । वृ॒ष॒भम् । सु॒ऽरेत॑सम् । वि॒श्वाहा॑ । शु॒क्रम् । पयः॑ । अ॒स्य॒ । धु॒क्ष॒त॒ ॥

Mantra without Swara
स वह्नि: पुत्रः पित्रोः पवित्रवान्पुनाति धीरो भुवनानि मायया। धेनुं च पृश्निं वृषभं सुरेतसं विश्वाहा शुक्रं पयो अस्य दुक्षत ॥

सः। वह्निः। पुत्रः। पित्रोः। पवित्रऽवान्। पुनाति। धीरः। भुवनानि। मायया। धेनुम्। च। पृश्निम्। वृषभम्। सुऽरेतसम्। विश्वाहा। शुक्रम्। पयः। अस्य। धुक्षत ॥ १.१६०.३

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 3 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (पवित्रवान्) जिसके बहुत शुद्ध कर्म वर्त्तमान (पित्रोः) तथा जो वायु और आकाश के (पुत्रः) सन्तान के समान वर्त्तमान है (सः) वह (वह्निः) पदार्थों की प्राप्ति करानेवाला अग्नि (भुवनानि) लोकों को (पुनाति) पवित्र करता है। जो (धेनुम्) गौ के समान वर्त्तमान वाणी (सुरेतसम्) सुन्दर जिसका बल जो (वृषभम्) सब लोकों को रोकनेवाला (पृश्निम्) सूर्य है उस (शुक्रम्) शीघ्रता करनेवाले को और (पयः) दूध को (च) और (विश्वाहा) सब दिनों को पवित्र करता है, जिसको (धीरः) ध्यानवान् पुरुष (मायया) उत्तम बुद्धि से जानता है (अस्य) उस अग्नि की उत्तेजना से अभीष्ट सिद्धि को तुम (दुक्षत) पूरी करो ॥ ३ ॥
Essence
जैसे सूर्य समस्त लोकों को धारण करता और पवित्र करता है, वैसे सुपुत्र कुल को पवित्र करते हैं ॥ ३ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।