Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 16 / Mantra 8

191 Sukta
9 Mantra
1/16/8
Devata- इन्द्र: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्व॒मित्सव॑नं सु॒तमिन्द्रो॒ मदा॑य गच्छति। वृ॒त्र॒हा सोम॑पीतये॥

विश्व॑म् । इत् । सव॑नम् । सु॒तम् । इन्द्रः॑ । मदा॑य । ग॒च्छ॒ति॒ । वृ॒त्र॒ऽहा । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
विश्वमित्सवनं सुतमिन्द्रो मदाय गच्छति। वृत्रहा सोमपीतये॥

विश्वम्। इत्। सवनम्। सुतम्। इन्द्रः। मदाय। गच्छति। वृत्रऽहा। सोमऽपीतये॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 31 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
यह (वृत्रहा) मेघ को हनन करनेवाला (इन्द्रः) वायु (सोमपीतये) उत्तम-उत्तम पदार्थों का पिलानेवाला तथा (मदाय) आनन्द के लिये (इत्) निश्चय करके (सवनम्) जिससे सब सुखों को सिद्ध करते हैं, जिससे (सुतम्) उत्पन्न हुए (विश्वम्) जगत् को (गच्छति) प्राप्त होते हैं॥८॥
Essence
वायु आकाश में अपने गमनागमन से सब संसार को प्राप्त होकर मेघ की वृष्टि करने वा सब से वेगवाला होकर सब प्राणियों को सुखयुक्त करता है। इसके विना कोई प्राणी किसी व्यवहार को सिद्धि करने को समर्थ नहीं हो सकता॥८॥
Subject
फिर अगले मन्त्र में उसी के गुणों का उपदेश किया है-