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Rigveda Mandal 1 / Sukta 16 / Mantra 7

191 Sukta
9 Mantra
1/16/7
Devata- इन्द्र: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒यं ते॒ स्तोमो॑ अग्रि॒यो हृ॑दि॒स्पृग॑स्तु॒ शंत॑मः। अथा॒ सोमं॑ सु॒तं पि॑ब॥

अ॒यम् । ते॒ । स्तोमः॑ । अ॒ग्रि॒यः । हृ॒दि॒ऽस्पृक् । अ॒स्तु॒ । शम्ऽत॑मः । अथ॑ । सोम॑म् । सु॒तम् । पि॒ब॒ ॥

Mantra without Swara
अयं ते स्तोमो अग्रियो हृदिस्पृगस्तु शंतमः। अथा सोमं सुतं पिब॥

अयम्। ते। स्तोमः। अग्रियः। हृदिऽस्पृक्। अस्तु। शम्ऽतमः। अथ। सोमम्। सुतम्। पिब॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 31 Mantra » 2

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Meaning
मनुष्यों को जैसे यह वायु प्रथम (सुतम्) उत्पन्न किये हुए (सोमम्) सब पदार्थों के रस को (पिब) पीता है, (अथ) उसके अनन्तर (ते) जो उस वायु का (अग्रियः) अत्युत्तम (हृदिस्पृक्) अन्तःकरण में सुख का स्पर्श करानेवाला (स्तोमः) उसके गुणों से प्रकाशित होकर क्रियाओं का समूह विदित (अस्तु) हो, वैसे काम करने चाहियें॥७॥
Essence
मनुष्यों के लिये उत्तमगुण तथा शुद्ध किया हुआ यह पवन अत्यन्त सुखकारी होता है॥७॥
Subject
उक्त वायु कैसे गुणवाला है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-

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