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Rigveda Mandal 1 / Sukta 16 / Mantra 6

191 Sukta
9 Mantra
1/16/6
Devata- इन्द्र: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒मे सोमा॑स॒ इन्द॑वः सु॒तासो॒ अधि॑ ब॒र्हिषि॑। ताँ इ॑न्द्र॒ सह॑से पिब॥

इ॒मे । सोमा॑सः । इन्द॑वः । सु॒तासः॑ । अधि॑ । ब॒र्हिषि॑ । तान् । इ॒न्द्र॒ । सह॑से । पि॒ब॒ ॥

Mantra without Swara
इमे सोमास इन्दवः सुतासो अधि बर्हिषि। ताँ इन्द्र सहसे पिब॥

इमे। सोमासः। इन्दवः। सुतासः। अधि। बर्हिषि। तान्। इन्द्र। सहसे। पिब॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 31 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
अधि बर्हिषि) जिसमें सब पदार्थ वृद्धि को प्राप्त होते हैं, उस अन्तरिक्ष में (इमे) ये (सोमासः) जिनसे सुख उत्पन्न होते हैं, (इन्दवः) और सब पदार्थों को गीला करनेवाले रस हैं, वे (सहसे) बल आदि गुणों के लिये ईश्वर ने (सुतासः) उत्पन्न किये हैं, (तान्) उन्हीं को (इन्द्र) वायु क्षण-क्षण में (पिब) पिया करता है॥६॥
Essence
ईश्वर ने इस संसार में प्राणियों के बल आदि वृद्धि के लिये जितने मूर्तिमान् पदार्थ उत्पन्न किये हैं, सूर्य्य से छिन्न-भिन्न किये हुए उनको पवन अपने निकट करके धारण करता है, उसके संयोग से प्राणी और अप्राणी बल पराक्रमवाले होते हैं॥६॥
Subject
अब वायु किसलिये किसमें किन पदार्थों के रस को पीता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-