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Rigveda Mandal 1 / Sukta 16 / Mantra 2

191 Sukta
9 Mantra
1/16/2
Devata- इन्द्र: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒मा धा॒ना घृ॑त॒स्नुवो॒ हरी॑ इ॒होप॑वक्षतः। इन्द्रं॑ सु॒खत॑मे॒ रथे॑॥

इ॒माः । धा॒नाः । घृ॒त॒ऽस्नुवः॑ । हरी॒ इति॑ । इ॒ह । उप॑ । व॒क्ष॒तः॒ । इन्द्र॑म् । सु॒खऽत॑मे । रथे॑ ॥

Mantra without Swara
इमा धाना घृतस्नुवो हरी इहोपवक्षतः। इन्द्रं सुखतमे रथे॥

इमाः। धानाः। घृतऽस्नुवः। हरी इति। इह। उप। वक्षतः। इन्द्रम्। सुखऽतमे। रथे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 30 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(हरी) जो पदार्थों को हरनेवाले सूर्य्य के कृष्ण वा शुक्ल पक्ष हैं, वे (इह) इस लोक में (इमाः) इन (धानाः) दीप्तियों को तथा (इन्द्रम्) सूर्य्यलोक को (सुखतमे) जो बहुत अच्छी प्रकार सुखहेतु (रथे) रमण करने योग्य विमान आदि रथों के (उप) समीप (वक्षतः) प्राप्त कराते हैं॥२॥
Essence
जो इस संसार में रात्रि और दिन शुक्ल तथा कृष्णपक्ष दक्षिणायन और उत्तरायण हरण करनेवाले कहलाते हैं, उनसे सूर्य्यलोक आनन्दरूप व्यवहारों को प्राप्त कराता है॥२॥
Subject
फिर भी अगले मन्त्र में सूर्य्यलोक के गुणों का ही उपदेश किया है-