Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 159 / Mantra 4

191 Sukta
5 Mantra
1/159/4
Devata- द्यावापृथिव्यौ Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
ते मा॒यिनो॑ ममिरे सु॒प्रचे॑तसो जा॒मी सयो॑नी मिथु॒ना समो॑कसा। नव्यं॑नव्यं॒ तन्तु॒मा त॑न्वते दि॒वि स॑मु॒द्रे अ॒न्तः क॒वय॑: सुदी॒तय॑: ॥

ते । मा॒यिनः॑ । म॒मि॒रे॒ । सु॒ऽप्रचे॑तसः । जा॒मी इति॑ । सयो॑नी॒ इति॒ सऽयो॑नी । मि॒थु॒ना । सम्ऽओ॑कसा । नव्य॑म्ऽनव्यम् । तन्तु॑म् । आ । त॒न्व॒ते । दि॒वि । स॒मु॒द्रे । अ॒न्तरिति॑ । क॒वयः॑ । सु॒ऽदी॒तयः॑ ॥

Mantra without Swara
ते मायिनो ममिरे सुप्रचेतसो जामी सयोनी मिथुना समोकसा। नव्यंनव्यं तन्तुमा तन्वते दिवि समुद्रे अन्तः कवय: सुदीतय: ॥

ते। मायिनः। ममिरे। सुऽप्रचेतसः। जामी इति। सयोनी इति सऽयोनी। मिथुना। सम्ऽओकसा। नव्यम्ऽनव्यम्। तन्तुम्। आ। तन्वते। दिवि। समुद्रे। अन्तरिति। कवयः। सुऽदीतयः ॥ १.१५९.४

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 2 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (सुप्रचेतसः) सुन्दर प्रसन्नचित्त (मायिनः) प्रशंसित बुद्धि वा (सुदीतयः) सुन्दर विद्या के प्रकाशवाले (कवयः) विद्वान् जन (समोकसा) समीचीन जिनका निवास (मिथुना) ऐसे दो (सयोनी) समान विद्या वा निमित्त (जामी) सुख भोगनेवालों को प्राप्त हो वा जानकर (दिवि) बिजुली और सूर्य के तथा (समुद्रे) अन्तरिक्ष वा समुद्र के (अन्तः) बीच (नव्यंनव्यम्) नवीन नवीन (तन्तुम्) विस्तृत वस्तुविज्ञान को (ममिरे) उत्पन्न करते हैं (ते) वे सब विद्या और सुखों का (आ, तन्वते) अच्छे प्रकार विस्तार करते हैं ॥ ४ ॥
Essence
जो मनुष्य आप्त अध्यापक और उपदेशकों को प्राप्त हो विद्याओं को प्राप्त हो वा भूमि और बिजुली को जान समस्त विद्या के कामों को हाथ में आमले के समान साक्षात् कर औरों को उपदेश देते हैं, वे संसार को शोभित करनेवाले होते हैं ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।