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Rigveda Mandal 1 / Sukta 152 / Mantra 6

191 Sukta
7 Mantra
1/152/6
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ धे॒नवो॑ मामते॒यमव॑न्तीर्ब्रह्म॒प्रियं॑ पीपय॒न्त्सस्मि॒न्नूध॑न्। पि॒त्वो भि॑क्षेत व॒युना॑नि वि॒द्वाना॒साविवा॑स॒न्नदि॑तिमुरुष्येत् ॥

आ । धे॒नवः॑ । मा॒म॒ते॒यम् । अव॑न्तीः । ब्र॒ह्म॒ऽप्रिय॑म् । पी॒प॒य॒न् । सस्मि॑न् । ऊध॑न् । पि॒त्वः । भि॒क्षे॒त॒ । व॒युना॑नि । वि॒द्वान् । आ॒सा । आ॒ऽविवा॑सन् । अदि॑तिम् । उ॒रु॒ष्ये॒त् ॥

Mantra without Swara
आ धेनवो मामतेयमवन्तीर्ब्रह्मप्रियं पीपयन्त्सस्मिन्नूधन्। पित्वो भिक्षेत वयुनानि विद्वानासाविवासन्नदितिमुरुष्येत् ॥

आ। धेनवः। मामतेयम्। अवन्तीः। ब्रह्मऽप्रियम्। पीपयन्। सस्मिन्। ऊधन्। पित्वः। भिक्षेत। वयुनानि। विद्वान्। आसा। आऽविवासन्। अदितिम्। उरुष्येत् ॥ १.१५२.६

Ashtak » 2 Adhyay » 2 Varga » 22 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
जैसे (धेनवः) धेनु गौयें (सस्मिन्) अपने (ऊधन्) ऐन में हुए दूध से बछड़ों को पुष्ट करती हैं वैसे जो स्त्री (ब्रह्मप्रियम्) वेदाध्ययन जिसको प्रिय उस (मामतेयम्) ममत्व से माने हुए अपने पुत्र की (अवन्तीः) रक्षा करती हुई (आ, पीपयन्) उसकी वृद्धि उन्नति करती हैं वा जैसे (विद्वान्) विद्यावान् जन (आसा) मुख से (पित्वः) अन्न की (भिक्षेत) याचना करे और (अदितिम्) न नष्ट होनेवाली विद्या का (आविवासन्) सब ओर से सेवन करता हुआ (वयुनानि) उत्तम ज्ञानों को (उरुष्येत्) सेवे वैसे पढ़ानेवाले पुरुष औरों को विद्या और सिखावट का ग्रहण करावें ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे माता जन अपने लड़कों को दूध आदि के देने से बढ़ाती हैं, वैसे विदुषी स्त्री और विद्वान् पुरुष कुमार और कुमारियों को विद्या और अच्छी शिक्षा से बढ़ावें, उन्नतियुक्त करें ॥ ६ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ।