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Rigveda Mandal 1 / Sukta 151 / Mantra 3

191 Sukta
9 Mantra
1/151/3
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
आ वां॑ भूषन्क्षि॒तयो॒ जन्म॒ रोद॑स्योः प्र॒वाच्यं॑ वृषणा॒ दक्ष॑से म॒हे। यदी॑मृ॒ताय॒ भर॑थो॒ यदर्व॑ते॒ प्र होत्र॑या॒ शिम्या॑ वीथो अध्व॒रम् ॥

आ । वा॒म् । भू॒ष॒न् । क्षि॒तयः॑ । जन्म॑ । रोद॑स्योः । प्र॒ऽवाच्य॑म् । वृ॒ष॒णा॒ । दक्ष॑से । म॒हे । यत् । ई॒म् । ऋ॒ताय॑ । भर॑थः । यत् । अर्व॑ते । प्र । होत्र॑या । शिम्या॑ । वी॒थः॒ । अ॒ध्व॒रम् ॥

Mantra without Swara
आ वां भूषन्क्षितयो जन्म रोदस्योः प्रवाच्यं वृषणा दक्षसे महे। यदीमृताय भरथो यदर्वते प्र होत्रया शिम्या वीथो अध्वरम् ॥

आ। वाम्। भूषन्। क्षितयः। जन्म। रोदस्योः। प्रऽवाच्यम्। वृषणा। दक्षसे। महे। यत्। ईम्। ऋताय। भरथः। यत्। अर्वते। प्र। होत्रया। शिम्या। वीथः। अध्वरम् ॥ १.१५१.३

Ashtak » 2 Adhyay » 2 Varga » 20 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वृषणा) विद्या की वर्षा करानेवाले (यत्) जो (रोदस्योः) अन्तरिक्ष और पृथिवी के बीच वर्त्तमान (क्षितयः) मनुष्य (महे) अत्यन्त (दक्षसे) आत्मबल के लिये (वाम्) तुम दोनों का (प्रवाच्यम्) अच्छे प्रकार कहने योग्य (जन्म) विद्या के जन्म को (भूषन्) सुशोभित करें उनके सङ्ग से (यत्) जिस कारण (अर्वते) प्रशंसित विज्ञानवाले (ऋताय) सत्यविज्ञान युक्त सज्जन के लिये (होत्रया) ग्रहण करने योग्य (शिम्या) अच्छे कर्मों से युक्त क्रिया से (अध्वरम्) अहिंसा धर्मयुक्त व्यवहार को तुम (आ, भरथः) अच्छे प्रकार धारण करते हो और (ईम्) सब ओर से उसको (प्र, वीथः) व्याप्त होते हो इससे आप प्रशंसा करने योग्य हो ॥ ३ ॥
Essence
जो विद्वान् बाल्यावस्था से लेकर पुत्र और कन्याओं को विद्या जन्म की अति उन्नति दिलाते हैं, वे सत्यविद्याओं के प्रचार से सबको विभूषित करते हैं ॥ ३ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ।