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Rigveda Mandal 1 / Sukta 15 / Mantra 6

191 Sukta
12 Mantra
1/15/6
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यु॒वं दक्षं॑ धृतव्रत॒ मित्रा॑वरुण दू॒ळभ॑म्। ऋ॒तुना॑ य॒ज्ञमा॑शाथे॥

यु॒वम् । दक्ष॑म् । धृ॒त॒ऽव्र॒ता॒ । मित्रा॑वरुणा । दुः॒ऽदभ॑म् । ऋ॒तुना॑ । य॒ज्ञम् । आ॒शा॒थे॒ इति॑ ॥

Mantra without Swara
युवं दक्षं धृतव्रत मित्रावरुण दूळभम्। ऋतुना यज्ञमाशाथे॥

युवम्। दक्षम्। धृतऽव्रता। मित्रावरुणा। दुःऽदभम्। ऋतुना। यज्ञम्। आशाथे इति॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 28 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
(युवम्) ये (धृतव्रतौ) बलों को धारण करनेवाले (मित्रावरुणा) प्राण और अपान (ऋतुना) ऋतुओं के साथ (दूडभम्) जो कि शत्रुओं को दुःख के साथ धर्षण कराने योग्य (दक्षम्) बल तथा (यज्ञम्) उक्त तीन प्रकार के यज्ञ को (आशाथे) व्याप्त होते हैं॥६॥
Essence
जो सबका मित्र बाहर आनेवाला प्राण तथा शरीर के भीतर रहनेवाला उदान है, इन्हीं से प्राणी ऋतुओं के साथ सब संसाररूपी यज्ञ और बल को धारण करके व्याप्त होते हैं, जिससे सब व्यवहार सिद्ध होते हैं॥६॥
Subject
अब वायुविशेष प्राण वा उदान ऋतुओं के साथ क्या-क्या प्रकाश करते हैं, इस बात का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-