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Rigveda Mandal 1 / Sukta 15 / Mantra 11

191 Sukta
12 Mantra
1/15/11
Devata- अश्विनौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अश्वि॑ना॒ पिब॑तं॒ मधु॒ दीद्य॑ग्नी शुचिव्रता। ऋ॒तुना॑ यज्ञवाहसा॥

अश्वि॑ना । पिब॑तम् । मधु॑ । दीद्य॑ग्नी॒ इति॒ दीदि॑ऽअग्नी । शु॒चि॒ऽव्र॒ता॒ । ऋ॒तुना॑ । य॒ज्ञ॒ऽवा॒ह॒सा॒ ॥

Mantra without Swara
अश्विना पिबतं मधु दीद्यग्नी शुचिव्रता। ऋतुना यज्ञवाहसा॥

अश्विना। पिबतम्। मधु। दीद्यग्नी इति दीदिऽअग्नी। शुचिऽव्रता। ऋतुना। यज्ञऽवाहसा॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् लोगो ! तुमको जो (शुचिव्रता) पदार्थों की शुद्धि करने (यज्ञवाहसा) होम किये हुए पदार्थों को प्राप्त कराने तथा (दीद्यग्नी) प्रकाशहेतुरूप अग्निवाले (अश्विना) सूर्य्य और चन्द्रमा (मधु) मधुर रस को (पिबतम्) पीते हैं, जो (ऋतुना) ऋतुओं के साथ रसों को प्राप्त करते हैं, उनको यथावत् जानो॥११॥
Essence
ईश्वर उपदेश करता है कि मैंने जो सूर्य्य चन्द्रमा तथा इस प्रकार मिले हुए अन्य भी दो-दो पदार्थ कार्यों की सिद्धि के लिये संयुक्त किये हैं, हे मनुष्यो ! तुम अच्छी प्रकार सब ऋतुओं के सुख तथा व्यवहार की सिद्धि को प्राप्त करते हो, इनको सब लोग समझें॥११॥
Subject
फिर ऋतुओं के साथ में सूर्य्य और चन्द्रमा के गुणों का उपदेश अगले मन्त्र में किया है।