Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 148 / Mantra 4

191 Sukta
5 Mantra
1/148/4
Devata- अग्निः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
पु॒रूणि॑ द॒स्मो नि रि॑णाति॒ जम्भै॒राद्रो॑चते॒ वन॒ आ वि॒भावा॑। आद॑स्य॒ वातो॒ अनु॑ वाति शो॒चिरस्तु॒र्न शर्या॑मस॒नामनु॒ द्यून् ॥

पु॒रूणि॑ । द॒स्मः । नि । रि॒णा॒ति॒ । जम्भैः॑ । आत् । रो॒च॒ते॒ । वने॑ । आ । वि॒भाऽवा॑ । आत् । अ॒स्य॒ । वातः॑ । अनु॑ । वा॒ति॒ । शो॒चिः । अस्तुः॑ । न । शर्या॑म् । अ॒स॒नाम् । अनु॑ । द्यून् ॥

Mantra without Swara
पुरूणि दस्मो नि रिणाति जम्भैराद्रोचते वन आ विभावा। आदस्य वातो अनु वाति शोचिरस्तुर्न शर्यामसनामनु द्यून् ॥

पुरूणि। दस्मः। नि। रिणाति। जम्भैः। आत्। रोचते। वने। आ। विभाऽवा। आत्। अस्य। वातः। अनु। वाति। शोचिः। अस्तुः। न। शर्याम्। असनाम्। अनु। द्यून् ॥ १.१४८.४

Ashtak » 2 Adhyay » 2 Varga » 17 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
जो (विभावा) विशेषता से दीप्ति करने तथा (दस्मः) दुःख का नाश करनेवाला अग्नि (जम्भैः) चलाने आदि अपने गुणों से (पुरूणि) बहुत वस्तुओं को (अनु, द्यून्) प्रति दिन (नि, रिणाति) निरन्तर पहुँचाता है, (आत्) इसके अनन्तर (वने) जङ्गल में (आ, रोचते) अच्छे प्रकार प्रकाशमान होता है (आत्) और (अस्य) इसका सम्बन्धी (वातः) पवन (अनु, वाति) इसके पीछे बहता है, जिसकी (शोचिः) दीप्ति प्रकाशमान (अस्तुः) प्रेरणा देनेवाले शिल्पी जन की (असनाम्) प्रेरणा के (न) समान (शर्याम्) पवन की ताड़ना को प्राप्त होता है, उससे उत्तम काम मनुष्यों को सिद्ध करने चाहियें ॥ ४ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो विद्या से उत्पन्न की हुई ताड़नादि क्रियाओं से बिजुली की विद्या को सिद्ध करते हैं, वे प्रतिदिन उन्नति को प्राप्त होते हैं ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.