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Rigveda Mandal 1 / Sukta 142 / Mantra 9

191 Sukta
13 Mantra
1/142/9
Devata- सरस्वतीळाभारत्यः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
शुचि॑र्दे॒वेष्वर्पि॑ता॒ होत्रा॑ म॒रुत्सु॒ भार॑ती। इळा॒ सर॑स्वती म॒ही ब॒र्हिः सी॑दन्तु य॒ज्ञिया॑: ॥

शुचिः॑ । दे॒वेषु॑ । अर्पि॑ता । होत्रा॑ । म॒रुत्ऽसु॑ । भार॑ती । इळा॑ । सर॑स्वती । म॒ही ब॒र्हिः । सी॒द॒न्तु॒ । य॒ज्ञियाः॑ ॥

Mantra without Swara
शुचिर्देवेष्वर्पिता होत्रा मरुत्सु भारती। इळा सरस्वती मही बर्हिः सीदन्तु यज्ञिया: ॥

शुचिः। देवेषु। अर्पिता। होत्रा। मरुत्ऽसु। भारती। इळा। सरस्वती। मही बर्हिः। सीदन्तु। यज्ञियाः ॥ १.१४२.९

Ashtak » 2 Adhyay » 2 Varga » 11 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
जो (देवेषु) विद्वानों में (अर्पिता) समर्पण की हुई (होत्रा) देने-लेने योग्य क्रिया वा (मरुत्सु) स्तुति करनेवालों में (भारती) धारण-पोषण करनेवाली (शुचिः) पवित्र (इळा) प्रशंसा के योग्य (सरस्वती) प्रशंसित विज्ञान का सम्बन्ध रखनेवाली (मही) और बड़ी (यज्ञियाः) यज्ञ सिद्ध कराने के योग्य क्रिया (बर्हिः) समीप प्राप्त बढ़े हुए व्यवहार को (सीदन्तु) प्राप्त होवे उनको समस्त विद्यार्थी प्राप्त होवें ॥ ९ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। विद्यार्थियों को ऐसी इच्छा करनी चाहिये कि जो विद्वानों में विद्या वा वाणी वर्त्तमान है, वह हमको प्राप्त होवे ॥ ९ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।