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Rigveda Mandal 1 / Sukta 14 / Mantra 3

191 Sukta
12 Mantra
1/14/3
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒न्द्र॒वा॒यू बृह॒स्पतिं॑ मि॒त्राग्निं॑ पू॒षणं॒ भग॑म्। आ॒दि॒त्यान्मारु॑तं ग॒णम्॥

इ॒न्द्र॒वा॒यू इति॑ । बृह॒स्पति॑म् । मि॒त्रा । अ॒ग्निम् । पू॒षण॑म् । भग॑म् । आ॒दि॒त्यान् । मारु॑तम् । ग॒णम् ॥

Mantra without Swara
इन्द्रवायू बृहस्पतिं मित्राग्निं पूषणं भगम्। आदित्यान्मारुतं गणम्॥

इन्द्रवायू इति। बृहस्पतिम्। मित्रा। अग्निम्। पूषणम्। भगम्। आदित्यान्। मारुतम्। गणम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 26 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (कण्वाः) बुद्धिमान् विद्वान् लोगो ! आप क्रिया तथा आनन्द की सिद्धि के लिये (इन्द्रवायू) बिजुली और पवन (बृहस्पतिम्) बड़े से ब़ड़े पदार्थों के पालनहेतु सूर्य्यलोक (मित्रा) प्राण (अग्निम्) प्रसिद्ध अग्नि (पूषणम्) ओषधियों के समूह के पुष्टि करनेवाले चन्द्रलोक (भगम्) सुखों के प्राप्त करानेवाले चक्रवर्त्ति आदि राज्य के धन (आदित्यान्) बारहों महीने और (मारुतम्) पवनों के (गणम्) समूह को (अहूषत) ग्रहण तथा (गृणन्ति) अच्छी प्रकार जान के संयुक्त करो॥३॥
Essence
इस मन्त्र में पूर्व मन्त्र से कण्वाः अहूषत और गृणन्ति इन तीन पदों की अनुवृत्ति आती है।जो मनुष्य ईश्वर के रचे हुए उक्त इन्द्र आदि पदार्थों और उनके गुणों को जानकर क्रियाओं में संयुक्त करते हैं, वे आप सुखी होकर सब प्राणियों को सुखयुक्त सदैव करते हैं॥३॥
Subject
अब अगले मन्त्र में सब देवों में से कई एक देवों का उपदेश किया है-