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Rigveda Mandal 1 / Sukta 136 / Mantra 6

191 Sukta
7 Mantra
1/136/6
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- परुच्छेपो दैवोदासिः Chhanda- विराडत्यष्टिः Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
नमो॑ दि॒वे बृ॑ह॒ते रोद॑सीभ्यां मि॒त्राय॑ वोचं॒ वरु॑णाय मी॒ळ्हुषे॑ सुमृळी॒काय॑ मी॒ळ्हुषे॑। इन्द्र॑म॒ग्निमुप॑ स्तुहि द्यु॒क्षम॑र्य॒मणं॒ भग॑म्। ज्योग्जीव॑न्तः प्र॒जया॑ सचेमहि॒ सोम॑स्यो॒ती स॑चेमहि ॥

नमः॑ । दि॒वे । बृ॒ह॒ते । रोद॑सीभ्याम् । मि॒त्राय॑ । वोच॑म् । वरु॑णाय । मी॒ळ्हुषे॑ । सु॒ऽमृ॒ळी॒काय॑ । मी॒ळ्हुषे॑ । इन्द्र॑म् । अ॒ग्निम् । उप॑ । स्तु॒हि॒ । द्यु॒क्षम् । अ॒र्य॒मण॑म् । भग॑म् । ज्योक् । जीव॑न्तः । प्र॒ऽजया॑ । स॒चे॒म॒हि॒ । सोम॑स्य । ऊ॒ती । स॒चे॒म॒हि॒ ॥

Mantra without Swara
नमो दिवे बृहते रोदसीभ्यां मित्राय वोचं वरुणाय मीळ्हुषे सुमृळीकाय मीळ्हुषे। इन्द्रमग्निमुप स्तुहि द्युक्षमर्यमणं भगम्। ज्योग्जीवन्तः प्रजया सचेमहि सोमस्योती सचेमहि ॥

नमः। दिवे। बृहते। रोदसीभ्याम्। मित्राय। वोचम्। वरुणाय। मीळ्हुषे। सुऽमृळीकाय। मीळ्हुषे। इन्द्रम्। अग्निम्। उप। स्तुहि। द्युक्षम्। अर्यमणम्। भगम्। ज्योक्। जीवन्तः। प्रऽजया। सचेमहि। सोमस्य। ऊती। सचेमहि ॥ १.१३६.६

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 26 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् ! जैसे मैं (बृहते) बहुत (दिवे) प्रकाश करनेवाले के लिये वा (रोदसीभ्याम्) प्रकाश और पृथिवी से (मित्राय) सबके मित्र (वरुणाय) श्रेष्ठ (मीढुषे) शुभ गुणों से सींचने (सुमृळीकाय) सुख करने और (मीढुषे) अच्छे प्रकार सुख देनेवाले जन के लिये (नमः) सत्कार वचन (वोचम्) कहूँ वैसे आप कहो, वा जैसे मैं (इन्द्राय) परमैश्वर्य्यवाले (अग्निम्) अग्नि के समान वर्त्तमान (द्युक्षम्) प्रकाशयुक्त (अर्य्यमणम्) न्यायाधीश और (भगम्) धर्म सेवनेवाले को कहूँ वैसे आप (उप, स्तुहि) उसके समीप प्रशंसा करो, वा जैसे (जीवन्तः) प्राण धारण किये जीवते हुए हम लोग (प्रजया) अच्छे सन्तान आदि सहित प्रजा के साथ (ज्योक्) निरन्तर (सचेमहि) सम्बद्ध हों और (सोमस्य) ऐश्वर्य की (ऊती) रक्षा आदि क्रिया के साथ (सचेमहि) सम्बद्ध हों, वैसे आप भी सम्बद्ध होओ ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में अनेक वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। मनुष्यों को विद्वानों के समान चाल-चलन कर पदार्थविद्या के लिये प्रवृत्त हो तथा प्रजा और ऐश्वर्य को पाकर निरन्तर आनन्दयुक्त होना चाहिये ॥ ६ ॥
Subject
फिर मनुष्यों को किसके समान क्या करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।