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Rigveda Mandal 1 / Sukta 133 / Mantra 3

191 Sukta
7 Mantra
1/133/3
Devata- इन्द्र: Rishi- परुच्छेपो दैवोदासिः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अवा॑सां मघवञ्जहि॒ शर्धो॑ यातु॒मती॑नाम्। वै॒ल॒स्था॒न॒के अ॑र्म॒के म॒हावै॑लस्थे अर्म॒के ॥

अव॑ । आ॒सा॒म् । म॒घ॒ऽव॒न् । ज॒हि॒ । शर्धः॑ । या॒तु॒ऽमती॑नाम् । वै॒ल॒ऽस्था॒न॒के । अ॒र्भ॒के । म॒हाऽवै॑लस्थे । अ॒र्भ॒के ॥

Mantra without Swara
अवासां मघवञ्जहि शर्धो यातुमतीनाम्। वैलस्थानके अर्मके महावैलस्थे अर्मके ॥

अव। आसाम्। मघऽवन्। जहि। शर्धः। यातुऽमतीनाम्। वैलऽस्थानके। अर्भके। महाऽवैलस्थे। अर्मके ॥ १.१३३.३

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 22 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मघवन्) परम धनयुक्त राजन् ! (अर्मके) जो दुःख पहुँचाने हारा और (वैलस्थानके) जिसमें विलयुक्त स्थान हैं उनके समान (अर्मके) दुःख पहुँचानेहारे (महावैलस्थे) बड़े-बड़े गढ़ेलों से युक्त स्थान में (आसाम्) इन (यातुमतीनाम्) हिंसक सेनाओं के (शर्धः) बल को (अव, जहि) छिन्न-भिन्न करो ॥ ३ ॥
Essence
सेनावीरों को चाहिये कि शत्रुओं को सेनाओं को अतीव दुःख से जाने योग्य गढ़ेले आदि से युक्त स्थान में गिरा कर मारें ॥ ३ ॥
Subject
फिर शत्रुओं की सेना कैसे मारनी चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।