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Rigveda Mandal 1 / Sukta 13 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/13/7
Devata- उषासानक्ता Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
नक्तो॒षासा॑ सु॒पेश॑सा॒ऽस्मिन्य॒ज्ञ उप॑ ह्वये। इ॒दं नो॑ ब॒र्हिरा॒सदे॑॥

नक्तो॒षासा॑ । सु॒ऽपेश॑सा । अ॒स्मिन् । य॒ज्ञे । उप॑ । ह्व॒ये॒ । इ॒दम् । नः॒ । ब॒र्हिः । आ॒ऽसदे॑ ॥

Mantra without Swara
नक्तोषासा सुपेशसाऽस्मिन्यज्ञ उप ह्वये। इदं नो बर्हिरासदे॥

नक्तोषासा। सुऽपेशसा। अस्मिन्। यज्ञे। उप। ह्वये। इदम्। नः। बर्हिः। आऽसदे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 25 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
मैं (अस्मिन्) इस घर तथा (यज्ञे) सङ्गत करने के कामों में (सुपेशसा) अच्छे रूपवाले (नक्तोषसा) रात्रिदिन को (उपह्वये) उपकार में लाता हूँ, जिस कारण (नः) हमारा (बर्हिः) निवासस्थान (आसदे) सुख की प्राप्ति के लिये हो॥७॥
Essence
मनुष्यों को उचित है कि इस संसार में विद्या से सदैव उपकार लेवें, क्योंकि रात्रिदिन सब प्राणियों के सुख का हेतु होता है॥७॥
Subject
उक्त कर्म से दिनरात सुख होता है, सो अगले मन्त्र में प्रकाशित किया है-